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ब‍ेटियों काे अंधे कुएं में धकेल रहा स्याह सच्चाई का भय

 हरियाणा की बेटियां आज हर क्षेत्र में देश ही नहीं विश्वभर में विजय पताका फहरा रही हैं। बेटियों के प्रति सोच में भी बदलाव हुआ है, लेकिन वास्‍तविकता अब भी कड़वा अहसास देती है। सारी चर्चाओं व दावों के बावजूद दूसरा पहलू यह भी है कि यहां के बिगड़ते माहौल में बेटियों की जिंदगी नरक के समान पहले भी थी और आज भी है। लड़कियां बाल विवाह का संताप सहने को मजबूर हैं।

इसके लिए लड़कियों के प्रति अपराध भी काफी हद तक जिम्‍मेदार हैं। बदनामी का डर अभिभावक कच्‍ची उम्र में बेटियों की शादी करने में भलाई समझते हैं।स्कूल जा रही बच्चियों से छेड़छाड़, अपहरण कर दुष्कर्म की घटनाएं उनको जिंदगी की दौड़ में पीछे ले जा रही हैं। बाल विवाह के लिए कोई तर्क उचित न‍हीं हाे सकता, लेकिन जानकार इन घटनाओं और बदनामी के डर को भी इसके लिए जिम्‍मेदार मानते हैं। उनका कहना है माता-पिता और अभिभावक इसी कारण बच्चियों को बालिका वधू बनने पर मजबूर कर रहे हैं।

पानीपत जिले के एक गांव में ऐसा मामला सामने आया था। वहां 16 साल की लड़की की शादी 24 साल के लड़के के साथ की जा रही थी। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय की टीम ने सूचना मिलने के बाद वहां जाकर शादी रुकवाई। इस दौरान मामले की असली वजह सामने आई कि लड़की का अपने ही चाचा के लड़के के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और वह उसके साथ घर से भागने की कोशिश में थी। परिजनों ने समाज में अपनी इज्जत के लिए नाबालिग उम्र में ही लड़की की शादी करने का फैसला कर लिया था।