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पराली जलाने से बिगड़ रहा धरती का स्वास्थ्य : धर्मवीर

कुरुक्षेत्र :वर्तमान दौर में खेतों में पराली को आग लगाने, जमीन से लगातार पानी का दोहन करने व असंतुलित खादों तथा दवाइयों का प्रयोग करने से भूमि का स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है। किसानों को प्रण लेना होगा कि भूमि के स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए पराली का प्रबंध व पानी की बचत करेंगे। यह बातें अतिरिक्त उपायुक्त धर्मवीर ¨सह ने कही। वे मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कार्यालय में आयोजित विश्व मृदा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।

अतिरिक्त उपायुक्त ने दैनिक जागरण की पराली नहीं जलाएंगे, पर्यावरण बचाएंगे मुहिम को आगे बढ़ाते हुए किसानों को फसल अवशेष न जलाने की शपथ भी दिलाई। मुहिम के साथ किसानों ने जुड़ते हुए शपथ पत्र भरते हुए दूसरे किसानों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि धरती की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेवारी है। लगातार फसल अवशेष जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि उत्पादन घटने के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है। किसी भी वर्ष बारिश नहीं हुई और सूखा पड़ गया तो प्रदेश की स्थिति काफी खराब हो जाएगी। उस स्थिति से निपटने के लिए अभी से जागरूक होकर काम करना होगा। देश की आजादी के समय खेतों में नाममात्र की खाद्य सामग्री पैदा होता था, लेकिन आज पैदावार काफी बढ़ चुकी है। किसानों को फसल विविधिकरण को अपनाना होगा, दवाइयों का वैज्ञानिकों की सलाह के साथ प्रयोग करना होगा, खेतों में पराली को आग लगाने के बजाय प्रबंधन की तरफ ध्यान देना होगा। इस अवसर पर डॉ. हरिओम, डॉ. फतेह ¨सह, डॉ. भाटिया, डॉ. दलेल ¨सह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।

न करें जमीन का शोषण

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि अब जमीन का शोषण बंद करना होगा। किसानों को जमीन की सेहत के बारे में सोचना होगा। खेतों में पराली को आग न लगाने का प्रण करना होगा। सरकार ने भी निर्णय लिया है कि किसानों की पराली को 5 रुपये 50 पैसे के हिसाब से खरीदा जाएगा। इस निर्णय से किसानों को प्रति एकड़ करीब 11 हजार रुपये की आय होगी। दैनिक जागरण की ओर से किसानों पराली न जलाने को लेकर सार्थक मुहिम शुरू की गई है। इस मुहिम के साथ सभी किसानों को जुड़ना होगा, तभी यह सफल हो पाएगी।

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जागरूक हों धरतीपुत्र

इफको की ओर से विश्व मृदा दिवस पर पिपली में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के जिला उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बतौर मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की जबकि अध्यक्षता इफको के वरिष्ठ प्रबंधक शमशेर ¨सह ने की। मुख्यातिथि ने कहा कि किसानों को धरती की सुरक्षा को लेकर जागरूक होना होगा। जब तक किसान इसके प्रति जागरूक नहीं होंगे तब तक भूमि की उर्वरता में सुधार नहीं होगा। इफको के वरिष्ठ प्रबंधक ने कहा कि इफको की ओर से किसानों को जैविक खाद मुहैया करवाई जा रही है ताकि किसान रासायनिक खादों को प्रयोग कम कर सकें। इसके लिए जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।