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संदिग्ध हालात में चली गोली, एनएसजी कमांडो की मौत

मानेसर (गुरुग्राम) अपनी ही एमपी फाइव गन से संदिग्ध हालात में चली गोली से एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) कमांडो जितेंद्र ¨सह यादव (34) की मौत हो गई। वहीं एक-एक गोली उनकी पत्नी (30) तथा साली (19) को लगी। उन्हें मानेसर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया गया। दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना सुबह करीब मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे हुई। पुलिस ने मामले की पहले आत्महत्या के पहलू से जांच की, लेकिन बाद में पुलिस अधिकारी मानने लगे कि घटना की वजह हादसा भी हो सकता है। कमांडो की पत्नी व साली के बयान के बाद ही सच क्या है, इसकी जानकारी होगी। खबर लिखे जाने तक पुलिस ने मामला भी नहीं दर्ज किया था। एनएसजी की ओर से भी पुलिस को कोई बयान नहीं दिया गया है। पुलिस को कमांडो के परिजनों का इंतजार है जो कानपुर से देर रात तक गुरुग्राम पहुंचेंगे।

वर्ष 2001 में बीएसएफ में भर्ती हुए गांव सरांय पोखरियान जिला कानपुर देहात (यूपी) जितेंद्र ¨सह यादव पुत्र दयाराम करीब दो साल से डेपुटेशन पर एनएसजी में तैनात थे। इस समय वह एएसआइ रैंक पर थे। वह परिवार के साथ कैंपस के अंदर ही बनी रिहायशी कालोनी के मकान नंबर 42 में रह रहे थे। सुबह करीब साढ़े पांच बजे उनके मकान में गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो पड़ोसी मकान के अंदर पहुंचे। अंदर जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। गले में गोली लगने से जितेंद्र दम तोड़ चुके थे। उनकी पत्नी गुड्डन फेफड़े में गोली लगने से बेहोश हो चुकी थी। उसके बगल में ही जितेंद्र की साली खुशबू पेट में लगी गोली से तड़प रही थी।

पड़ोसी ने अधिकारियों को सूचना दी तो तीनों को फौरन रॉकलैंड अस्पताल लाया गया, जहां जितेंद्र को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं गुड्डन व खुशबू को आइसीयू में दाखिल कर सर्जरी की गई। दोनों को देर शाम तक होश नहीं आया था। घटना की सूचना अस्पताल से मिलने के बाद सुबह करीब साढ़े सात बजे मानेसर थाना प्रभारी टीम के साथ पहुंचे और जांच शुरू की। गोली जितेंद्र के कंधे पर लटक रही सरकारी गन से चली थी। पुलिस यह जांच करने में पूरे दिन लगी रही कि जितेंद्र ने पत्नी व साली को गोली मार खुद तो आत्महत्या नहीं कर ली।

हालांकि क्राइम सीन व फोरे¨सक जांच के बाद पुलिस अधिकारी यह भी कहने लगे कि हादसा भी हो सकता है। पड़ोस में रहने वाले लोगों ने भी घर में कैसा माहौल था, इस बात से अनभिज्ञता जताई है। जितेंद्र की साली सात दिन पहले भी यहां आई थी। पुलिस यह पता करने में लगी रही कि कहीं उसको लेकर घर में कुछ बात तो नहीं हुई। घटना के वक्त जितेंद्र की आठ साल की बेटी अंजली व दो साल का बेटा आयूष सो रहे थे।

पत्नी ने पेट व कमर दर्द बता बुलाया था: एसएसजी सूत्रों के मुताबिक जितेंद्र नाइट ड्यूटी पर थे। उनके मोबाइल पर सुबह करीब सवा चार बजे उनकी पत्नी का फोन आया, जिसके बाद वह अपने सीनियर को यह बता कर घर गए कि उनकी पत्नी की कमर व पेट में असहनीय दर्द हो रहा है। जितेंद्र ने सही बताया या बहाना बनाकर गए, यह तो उनकी पत्नी के होश में आने के बाद ही पता चलेगा।

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हमें सूचना मिली थी कि कमांडो ने पत्नी व साली को गोली मार आत्महत्या कर ली है। जिसके बाद ही हम घटनास्थल पहुंचे थे। जवान ने पत्नी व साली को गोली मार आत्महत्या की या फिर ऑटोमेटिक वेपन से लापरवाही में गोली चली, यह जांच चल रही है। घायलों के बयान पर भी सब निर्भर है।