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नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हुडा की जमीन पर बने स्कूल

स्कूल की दाखिला प्रकिया में कमजोर तबके के बच्चों का बीस प्रतिशत कोटा रखने का वादा कर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) से सस्ते में जमीन लेने वाले वाले निजी स्कूलों का प्रबंधन अपना वादा भूल चुका है। कई नामी स्कूलों ने तो इस बात को तवज्जो ही नहीं दी। किसी ने दी तो एक दो प्रतिशत कोटा भर कर ही काम चला लिया। इन स्कूलों पर प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मेहरबान रहे। दाखिले के लिए जरूरतमंद परिवारों के बच्चे स्कूल के गेट से लौटे और माता-पिता की अंगुली पकड़ अधिकारियों के पास भी पहुंचे पर किसी का दिल नहीं पसीजा।

हुडा ने सस्ती दर पर स्कूल बनाने के लिए जमीन लेने वाले स्कूल प्रबंधन से करार किया था कि स्कूलों में दस प्रतिशत सीटों पर सरकारी स्कूलों के बराबर फीस पर शिक्षा दी जाएगी और दस प्रतिशत सीटों पर मेरिट के आधार पर दाखिले दिए जाएंगे। लेकिन शहर के स्कूलों ने इन नियमों का पालन नहीं किया। 64 निजी स्कूलों में से 63 में मात्र दो से तीन प्रतिशत तक सीटों पर दाखिला दिया गया है। आरटीआइ के जरिये जुटाई गई जानकारी के मुताबिक शहर के बड़े से छोटे स्कूल बीस प्रतिशत तो क्या, दो से तीन प्रतिशत दाखिले भी नियमों के अनुसार नहीं दे रहे हैं।

क्या है नियम

हुडा की जमीन पर स्कूल खोलने के लिए जमीन रियायती दामों पर दी जाती है। इसके बदले में स्कूलों से एग्रीमेंट किया जाता है कि स्कूल में कुल सीट संख्या की दस प्रतिशत सीटों पर तो सरकारी फीस ली जाएगी और दस प्रतिशत सीटों पर दाखिले मेरिट के आधार पर दिए जाएंगे। इन नियमों के अनुसार शहर के स्कूल न तो दाखिले दे रहे हैं और न ही किसी आदेश का पालन कर रहे हैं।

मुख्य सूचना आयुक्त, हरियाणा ने सेक्शन 25-5 के तहत स्कूलों को एक पत्र लिखा था। पत्र में पूछा गया था कि स्कूलों ने नियमों के तहत कितनी सीटों पर दाखिला दिया है, इसकी जानकारी स्कूलों में बोर्ड पर टांगे, वेबसाइट पर सूचना अपलोड करें और मौखिक सूचना दें। लेकिन अभी तक इसका पालन स्कूलों में नहीं हुआ है। दो नवंबर को जारी किए गए पत्र के बावजूद स्कूलों ने इन आदेशों का पालन नहीं किया है।

रेयान स्कूल ने मना कर दिया: आरटीआइ कार्यकर्ता ह¨रद्र धींगड़ा के मुताबिक मिली जानकारी में रेयान स्कूल ने अपने आप को अल्पसंख्यक बताकर किसी भी तरह की जानकारी देने से मना कर दिया है। ऐसे में वहां की सीटों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।

हुडा के करारनामे में साफ लिखा है कि अगर कोई स्कूल हुडा की जमीन पर है तो उसे बीस प्रतिशत सीटों पर कमजोर तबके के विद्यार्थियों को दाखिला देना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनकी लीज को रद कर दिया जाएगा। लगातार आदेश के बाद भी न तो स्कूलों ने कमजोर तबके के विद्यार्थियों को दाखिले दिए और न ही उसकी जानकारी मुहैया करवाई है। अब हमने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है।