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बिना तैयारी स्वच्छता की दौड़ में हाईटेक सिटी

गुरुग्राम: एक महीने बाद 4 जनवरी से शुरू होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए जमीनी स्तर पर तैयारियां पूरी नहीं हैं। शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर सफाई के प्रति निगम अधिकारियों की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। गुरुग्राम यूं तो प्रदेश की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ हाईटेक सिटी कहलाता है। इसकी तुलना ¨सगापुर से भी की जाती है, लेकिन हकीकत कुछ और है।

स्वच्छता के प्रति गंभीरता नहीं दिखाने के कारण स्वच्छता रैं¨कग 2017 के रिजल्ट में करनाल और फरीदाबाद जैसे शहरों ने भी गुरुग्राम से बाजी मार ली थी। गुरुग्राम का रैं¨कग में 112वां स्थान और करनाल का 65वां व फरीदाबाद का 88वां स्थान रहा था। अगर इस बार भी हालात यही रहे तो स्वच्छता रैं¨कग सुधरने के बजाय और नीचे जा सकती है। स्थिति यह है कि सालाना करोड़ों रुपये का सफाई के लिए बजट होने के बावजूद शहर स्वच्छ नजर नहीं आता है।खासतौर पर शहर की सड़कों के किनारे, ग्रीन बेल्ट और कॉलोनियों के खाली प्लाटों में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेस वे किनारे खांडसा गांव की सर्विस लेन और सेक्टर 12 ए के चौक पर पिछले करीब एक माह से कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, लेकिन नगर निगम की ओर से सफाई नहीं की गई है। सेक्टरों के साथ लगते नगर निगम के गांवों में भी सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। इसके कारण सेक्टरवासी भी परेशान हैं। खांडसा, इस्लामपुर गांव के बाहर सड़क के किनारे कचरा फैला रहता है।

2500 से ज्यादा हैं कर्मचारी

नगर निगम के चारों जोन में 2500 से ज्यादा सफाईकर्मी लगे हुए हैं। सड़कों की सफाई के लिए रोड स्वी¨पग मशीन भी लगी हुई है। लेकिन फिर भी शहर सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में शुमार नहीं हो पा रहा है। सर्वे शुरू होने में एक माह का वक्त है और अगर अभी भी सफाई व्यवस्था को सुधार लिया जाए तो रैं¨कग बेहतर हो सकती है।