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नदियों में खनन माफिया का राज, छापे और गिरफ्तारियां सब ' फिक्स '

पानीपत : यमुनानगर से लेकर दिल्ली तक यमुना समेत तमाम नदियों में खनन माफिया का आतंक या यूं कहें राज है। उनकी मर्जी के बिना वहां कोई पुलिस वाला पहुंच नहीं सकता। इस धंधे में सारा कुछ 'फिक्‍स' है। जब भी पुलिस को खनन जोन में छापेमारी की औपचारिकता पूरी करनी होती है तो पहले माफिया से मंजूरी लेनी पड़ती है। पहले से तय होता है कि छापे में कितने वाहन पकड़े जाने हैं और किसकी गिरफ्तारी की जानी है। कार्रवाई के नाम पर कुछ समय का दिखावा होता है और फिर वही माफिया राज नदियों में पसर जाता है। यदि कोई अ‍धिकारी कार्रवाई करने या अवैध खनन रोकने का 'दुस्‍साहस' करता है ताे उसे भारी खामियाजा भुगतना पड़ता है। 

यमुना नदी के एक ओर उत्‍तर प्रदेश और दूसरी ओर हरियाणा है। जब हरियाणा में सख्ती होती है तो तस्‍कर उत्‍तर प्रदेश की ओर चले जाते हैं और यूपी में सख्ती होती है तो हरियाणा की ओर आ जाते हैं। यह क्रम 20 साल से लगातार चल रहा है। इस वक्त यमुना और इसकी सहायक नदियों में खनन माफिया का इतना कब्जा है कि सरकारी ठेकेदार भी वहां का ठेका लेने से बचते हैं।सरकारी ठेकेदारों को पुलिस सरंक्षण नहीं देती। इस वजह से माफिया मजबूत हो रहा है।

हाल ही में यमुनानगर के खिजराबाद के खनन जोन में युवक की मौत के बाद गांव अराइयांवाला के लोगों ने जमकर बवाल काटा। पुलिस अफसर को पीटकर अधमरा कर दिया। हालात यह हो गए कि पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।