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नगर निगम को भंग करने के लिए सुलगने लगी चिंगारी

नगर निगम को भंग करने के लिए चिंगारी अब सुलगने लगी है। भाजपा के साथ-साथ इनेलो और कांग्रेस का भी निगम भंग करने को लेकर समर्थन मिलता नजर आ रहा है। इनेलो, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भी निगम भंग होने में अपना फायदा नजर आ रहा है।

सभी को लग रहा है कि जब नगर परिषद बन जाएगी, तो उनके हाथ में जीत का लड्डू होगा, क्योंकि परिषद में वार्ड छोटे हो जाएंगे, वोटर कम हो जाएंगे, खर्चा भी कम होगा और लोगों तक पहुंच आसान हो जाएगी। वहीं भाजपा की मंशा पर विरोधी पार्टियों को शक हो रहा है। विपक्ष यह मानकर चल रहा है कि यदि निगम भंग हुई, तो एक साल तक तो चुनाव भूल ही जाओ। इतना ही नहीं यदि सरकार ने चाहा, तो निगम या परिषद के चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही करवाए।भाजपा के पार्षद सीबी गोयल ने कहा कि वर्ष 2010 में कौन से पार्षद या पंचायत प्रतिनिधि से निगम को लेकर राय ली गई थी। गोयल ने कहा कि मेयर के कारण शहर में विकास नहीं हो पाया। पिछले तीन सालों में उन्होंने किसी अधिकारी को पंचकूला में टिकने नहीं दिया। जो भी कमिश्नर, इओ या अन्य अधिकारी आए, उन्हे पहले ही भ्रष्ट कह देती थीं। उन्हे काम नहीं करने देती थीं।

आज जब सरकार बिगड़ती व्यवस्था को ठीक करना चाहती है, तो मेयर को स्पेशल बैठक की याद आ गई। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं कि यदि निगम की बैठक हुई, तो प्रस्ताव निगम भंग करने के खिलाफ ही पास होगा।