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सरस और शिल्प मेला समाप्त होने से ब्रह्मासरोवर पर छाई विरानगी

कुरुक्षेत्र : अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव पर ब्रह्मासरोवर के तट पर आयोजित सरस और शिल्प मेले के समापन विरानगी छा गई। सोमवार को इक्का-दुक्का शिल्पकार ही ब्रह्मासरोवर दिखाई दिए। शिल्पकारों के जाते ही स्थानीय दुकानदारों ने ब्रह्मासरोवर के सदरियों में सेल लगाकर रौनक बनाए रखी। पर्यटकों ने भी सेल से खरीदारी करने में खूब दिलचस्पी दिखाई। हालांकि दूसरे प्रदेशों से आए शिल्पकारों को सामान समेटने में दोपहर तक का समय लगाया। इसका फायदा पर्यटकों ने उठाया और शिल्पकारों से कम दामों पर बिक्री की।

ब्रह्मासरोवर के तट पर 17 नवंबर को सरस और शिल्प मेले की शुरुआत हुई थी। 3 दिसंबर तक 28 लाख से ज्यादा पर्यटकों ने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का अवलोकन किया। सोमवार को बड़ी संख्या में पर्यटक शिल्पकारों से खरीदारी करने पहुंचे। लोकल दुकानदारों ने सेल के जरिये पर्यटकों को खूब रिझाने का प्रयास किया।

शिल्प मेले में 22 राज्यों से 250 शिल्पकार पहुंचे थे और सरस मेले की 22 राज्यों से 250 स्वयं सहायता समूहों ने शोभा बढ़ाई। राष्ट्रीय अवार्डी 19 और स्टेट अवार्डी 18 शिल्पकार सहित संत कबीरदास अवाíडयों ने मेले में कला का हुनर बिखेरा। मेले में शिल्पकला के कद्रदानों खूब दिलचस्पी दिखाई और जमकर खरीदारी भी की। रविवार को पर्यटकों ने जमकर खरीदारी की थी।

सामान समेटने में व्यस्त रहे शिल्पकार

सरस और शिल्प मेला समाप्त होने के बाद शिल्पकार दिनभर अपना सामान समेटने में व्यस्त रहे। ब्रह्मासरोवर पर देश के हर कोने से शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए ब्रह्मासरोवर पर पहुंचे थे। रविवार देर रात्रि तक शिल्पकारों ने अपने उत्पादों की बिक्री की। सोमवार सुबह ही शिल्पकारों ने सामान को समेटना शुरू कर दिया था। दोपहर तक ब्रह्मासरोवर परिसर से सभी शिल्पकार अपने राज्यों को रवाना हो गए।