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अंधाधुंध रसायनिक प्रयोग से बंजर हो रही जमीन

जींद : ज्यादा उत्पादन के चक्कर में किसान अंधाधुंध रसायनिक का प्रयोग कर रहे हैं। इस अंधी दौड़ में जहां किसान की फसल पर लागत बढ़ रही है, वहीं इससे जमीन भी बंजर हो रही है। खेत में जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने की वजह से जमीन का पीएच मान (लवणीय अंग) लगातार बढ़ रहा है, जिससे गेहूं की उपजाऊ शक्ति कम होती जा रही है। कृषि विभाग द्वारा लिए जा रहे मिट्टी के नमूनों की जांच के आंकड़ों के अनुसार जिले में जमीन का औसतन पीएच मान 8.4 है, जबकि 6 से 8 के बीच पीएच मान फसल के उत्पादन के लिए सही रहता है।

फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि विशेषज्ञ यूरिया व डीएपी के साथ-साथ देसी खाद (गोबर व अन्य पदार्थों की गली-सड़ी खाद) की की सिफारिश करते थे। किसानों ने देसी खाद का प्रयोग बंद कर दिया और यूरिया के प्रयोग पर ज्यादा बल दिया। इससे उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन पीएच मान बढ़ने से उपजाऊ शक्ति घटती चली गई। अत्याधिक रसायनों के प्रयोग से किसान जाने-अनजाने कैंसर जैसी बीमारियों को भी न्योता दे रहे हैं। ऐसे में किसानों के समक्ष जमीन की उर्वररा शक्ति कायम रखते हुए उत्पादन बढ़ाने की चुनौती है, जिसके लिए पारंपरिक तरीकों को छोड़ कर जैविक व अन्य तरीकों से खेती को बढ़ावा देना होगा।

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नाइट्रोजन की भी है कमी

जिले में लगभग 2.47 लाख हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। जमीन में नाइट्रोजन (ओर्गेनिक कार्बन) की भी भारी कमी है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा केवल 0.36 प्रतिशत है, जबकि नाइट्रोजन की मात्रा 0.4 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। 0.4 से 0.8 प्रतिशत तक मध्यम व 0.8 प्रतिशत से ज्यादा न्यूनतम मध्यम की श्रेणी में माना गया है। नाइट्रोजन की कमी को दूर करने के लिए खाली समय में जमीन में डांचा व मूंग की बिजाई करने की कृषि विभाग द्वारा सिफारिश की जाती है।

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बनाए जा रहे हैं सोएल हेल्थ कार्ड

कृषि विभाग द्वारा फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों के सोएल हेल्थ कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसमें विभाग द्वारा खेतों से मिट्टी का सैंपल लेकर उसकी जांच करके पता लगाया जा रहा है कि जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है। इस आधार पर रिपोर्ट कार्ड बनाकर किसानों को उन कमियों को दूर करने के लिए जिन तत्वों की कमी है, उन्हें डालने के लिए सिफारिश की जा रही है। अभी तक जिले में 28 हजार से ज्यादा किसानों को सोएल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस साल 48 हजार मिट्टी के सैंपलों की जांच करने का लक्ष्य रखा गया है।

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आज बांटे जाएंगे सोएल हेल्थ कार्ड

कृषि विभाग द्वारा विश्व मृदा दिवस के अवसर पर मंगलवार को कार्यक्रम का आयोजन कर किसानों को सोएल हेल्थ कार्ड वितरित किए जाएंगे। मंगलवार सुबह नई सब्जी मंडी के पास कृषि विभाग कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी जांच के फायदों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए देशी खाद का प्रयोग करने व फसलों के अवशेष नहीं जलाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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किसानों को किया जा रहा जागरूक

जिला कृषि उप निदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उन्हें पता चल सके कि उसके खेत में किन पोषक तत्वों की जरूरत है। उन पोषक तत्वों को डाल कर किसान कम खर्च में अच्छी पैदावार ले सकते हैं। विभाग द्वारा अब तक 28 हजार से ज्यादा किसानों को सोएल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं।