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अस्पतालों को बंद रखकर सरकार के खिलाफ चंडीगढ़ में प्रदर्शन करेगी आइएमए

हिसार : कारपोरेट अस्पतालों के मालिकों को फायदा पहुंचाने के लिए हरियाणा सरकार दी हरियाणा क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2014 को लागू करवाना चाहती है। यह एक्ट न सिर्फ जन विरोधी बल्कि डॉक्टर विरोधी साबित होगा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन किसी भी सूरत में उक्त एक्ट लागू नहीं होने देगी। इसके विरोध में 7 दिसंबर को चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में प्रदेश के हजारों चिकित्सक प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद स्वास्थ्य आयुक्त के साथ बैठक होनी है, जिसमें पुराने एक्ट की बजाए एसोसिएशन की आपत्ति के बाद संशोधित एक्ट लागू करने की मांग होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सभी निजी अस्पतालों के चिकित्सकों का सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। यह बात पत्रकारवार्ता के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राज्य प्रधान डा. एपी सेतिया ने कही। उनके साथ एसोसिएशन के राज्य महासचिव डा. अजय महाजन और जिला प्रधान डा. जेपीएस नलवा मौजूद थे।

डा. सेतिया ने बताया कि फोर्टिस अस्पताल प्रकरण को लेकर 7 दिसंबर को स्वास्थ्य आयुक्त ने सभी निजी अस्पतालों में सीइओ और डायरेक्टर को मी¨टग के लिए बुलाया है। एसोसिएशन से जुड़े करीब साढ़े सात हजार चिकित्सक चंडीगढ़ जाकर क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2014 का विरोध करेंगे। इस दौरान अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रखेंगे। इस दौरान मरीजों को होनी वाली परेशानी के लिए सरकार जिम्मेवार होगी। डा. सेतिया की मानें तो एक्ट लागू होने से मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। कारपोरेट अस्पतालों को फायदा होगा। छोटे व मध्यम श्रेणी के अस्पतालों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जोकि मरीज से इलाज की फीस के तौर पर वसूला जाएगा। अभी 100 रुपये में होने वाला इलाज एक्ट लागू होने के बाद 200 रुपये में होगा। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि पहले ही आमजन को स्वास्थ्य का अधिकार देने में हरियाणा सरकार विफल रही है। इस एक्ट को जबरदस्ती लागू करके उनसे रियायती स्वास्थ्य सुविधाएं भी छीन लेगी।

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अपने फैसले पर बैकफुट हुई सरकार : डा. महाजन

एसोसिएशन के राज्य महासचिव डा. अजय महाजन ने बताया कि सरकार खुद फैसला करती है लेकिन स्टैंड नहीं लेती है। हर बार बैकफुट पर आ जाती है। हमेशा केंद्र सरकार के इशारों पर काम होता है। जब सारा काम केंद्र सरकार के जरिए होना है तो प्रदेश में सरकार का क्या काम। हर फैसला हाईकमान करेगी, जबकि राज्य सरकार को एक्ट लागू करने, न करने, संशोधन करने और न करने सहित तमाम शक्तियां प्रदान हैं। फिर अपने ही फैसले रद कर देती है। यह गलत है और जनहित में नहीं है।

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