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छतबीड़ जू में प्लास्टिक बोतल की भी नो एंट्री

जीरकपुर: छतबीड़ चिड़ियाघर में पॉलीथिन के लिफाफे पर पहले से प्रतिबंध है। लेकिन बाघ द्वारा पानी की बोतल चबाने की घटना के बाद से एहतियात के तौर पर अब चिड़ियाघर प्रशासन ने मेन गेट से आगे पीने के पानी की प्लास्टिक की बोतल पर भी नो एंट्री का मन बना लिया है।

दरअसल रविवार को चिड़ियाघर परिसर में बाघ के बाड़े में किसी पर्यटक ने बाघ का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए पीने के पानी की प्लास्टिक की बोतल फेक दी थी। रविवार छुट्टी का दिन होने की वजह से चिड़ियाघर पहुचने वाले पर्यटकों की संख्या पांच हजार के करीब थी व बाघ के बाड़े के आगे पर्यटकों की भीड़ अधिक होने की वजह से किसी का इस और ध्यान ही नहीं गया की वह बोतल किसने और कब फेंकी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार छतबीड़ चिड़ियाघर के फील्ड डायरेक्टर मधुकर सुधाकर ने इस घटना को लेकर जू कर्मचारियों की एक उच्चस्तरीय मीटिंग ली जिसमें उन्होंने इस घटना को भविष्य में घटित होने से रोकने के उपायों के बारे में चर्चा की। जू डायरेक्टर मधुकर सुधाकर से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया की उनका पूरा ध्यान जू के जानवरों व पर्यटकों की सुरक्षा का है और वह समय समय पर एहतियातन कदम उठाते भी रहते हैं। मधुकर सुधाकर के अनुसार तमाम चेतावनी और खतरों के बावजूद बहुत से लोग जानवरों से छेड़खानी करने से नहीं चूकते। जानवरों को खाने-पीने की चीजें भी देते हैं, इससे जीवों को भी खतरा रहता है। जिसके लिए भविष्य में जरूरी प्रबंध किए जाएंगे।

उन्होंने कहा की वह जू में बाहर से पीने के पानी की प्लास्टिक की बोतल को बैन करने के बारे में सोच रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर यह पॉलिसी मंजूर हो गई तो जू परिसर में कैंटीन में उपलब्ध पीने के पानी की बोतल के लिए पर्यटकों को सिक्योरिटी राशी देनी होगी जिसका रिफंड कैंटीन में खाली बोतल देकर ही मिलेगा।