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मेवात मॉडल स्कूलों से अभिभावकों का उठा भरोसा

तावडू :मेवात मॉडल स्कूल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं। इन स्कूलों में अध्यापक व अन्य स्टाफ की भर्ती में फर्जीवाड़ा व भ्रष्टाचार के आरोप कोई नई बात नहीं है। लेकिन लगभग दो वर्ष से स्कूलों में इन आरोपों के अलावा छात्राओं से अध्यापकों द्वारा छेड़खानी व धर्म परिवर्तन के मामले भी शामिल हो गए हैं। इन कारनामों ने इन स्कूलों की साख को जिला ही नहीं प्रदेश स्तर पर गिराया है। अगर सरकार व प्रशासन अब भी नहीं जागा तो वह दिन दूर नहीं जब इन स्कूलों के ताले लग जाएंगे।

वर्षों पूर्व सरकार द्वारा प्रदेश के सबसे पिछड़े नूंह जिले में बच्चों को न्यूनतम शुल्क पर उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देने को लेकर इन स्कूलों को खोला गया। कुछ समय तक तो स्कूलों ने खूब प्रशंसा प्राप्त की। लेकिन बाद में स्कूल में अध्यापकों व अन्य पदों की भर्ती, निर्माण कार्य व अन्य कार्यों में भ्रष्टाचार के दाग ने स्कूलों की छवि को कलंकित करना शुरू कर दिया। तब भी जनता का इन स्कूलों से भरोसा नहीं डगमगाया। लेकिन गत दो वर्ष से इन स्कूलों पर जो दाग लग रहा है उसने अभिभावकों को सोचने पर अवश्य मजबूर कर दिया है। गत वर्ष तावडू स्कूल में कार्यरत अध्यापक सरफराज अंजुम पर छात्राओं के साथ अनगर्ल बातों को सांझा करने के आरोप लगे। उसके बाद मढ़ी स्कूल के तीन अध्यापकों पर ¨हदू बच्चों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के आरोप लगे।

ये मुद्दे ठंडे नहीं पड़े कि फिरोजपुर झिरका स्कूल के अध्यापक साकिर पर स्कूल की छात्रा के साथ छेड़खानी का आरोप लग गया। वर्तमान में उक्त अध्यापक न्यायिक हिरासत में है। इन बेहद शर्मनाक कृत्यों से अभिभावकों व बच्चों पर गहरी चोट लगी है। कुछ अभिभावकों ने तो नाम न छापने की शर्त पर कहा अगले सत्र में किसी भी सूरत में बच्चों को इन स्कूलों में दाखिल नहीं करेंगे।