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जिला अस्पताल में दीवार तक सीमित चादर बदलने के नियम


रोहतक। प्रदेश सरकार भले ही जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए नए-नए नियम बना रही हो, स्वास्थ्य विभाग इनकी धज्जियां उड़ाने में कसर नहीं छोड़ता। जिला अस्पताल रोहतक का महिला एवं प्रसूति विभाग भी इनमें से एक है। यहां दीवारों पर हर दिन मरीजों को अलग-अलग रंग की चादर देने का दावा तो किया जाता है, लेकिन इस आदेश पर अमल नहीं होता।

स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार पीले रंग की चादर शनिवार के लिए निर्धारित है। लेकिन रविवार को जिला अस्पताल के महिला एवं प्रसूति विभाग के वार्ड में भी पीले रंग की चादर देखने को मिली। नियमानुसार रविवार को पीच (बादामी) कलर की होनी चाहिए थी। 

हालांकि, आपातकालीन विभाग में इसका रंग बादामी ही था। अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से जच्चा-बच्चा में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। लापरवाही का आलम यह है कि कुछ बेड पर तो चादर तक नहीं बिछाई गई है। मरीज बगैर चादर के बेड पर लेटे मिले। महिलाओं ने बताया कि चादर गंदी होने पर उन्होंने नीचे रख दी लेकिन बार-बार मांगने पर भी साफ चादर नहीं दी जाती।
इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि अस्पताल में हर दिन तय रंग के अनुसार चादर बिछाई जाती है। जच्चा और मरीजों के स्वास्थ्य को देखते हुए हम प्रयास करते हैं कि अस्पताल को संक्रमण मुक्त रखा जाए।