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हेरीटेज स्टीम लोकोशेड में पहुंचे इंडियन स्टीम रेलवे सोसायटी से जुड़े लोग व विदेशी सैलानी

छुक-छुक करती फेयरी क्वीन जैसे ही रेवाड़ी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 3 पर पहुंची उत्साह के साथ रेलवे अधिकारियों ने जोश के साथ उसका स्वागत किया। रेलवे के सबसे लाड़ले इंजन फेयरी क्वीन में सवार होकर जहां सैलानी व इंडियन स्टीम रेलवे सोसायटी के लोग लोको शेड देखने के लिए पहुंचे थे वहीं रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोग फेयरी क्वीन को देखने व उसके साथ फोटो ¨खचाने की होड़ में लग गए।

दिल्ली कैंट से चलकर रेवाड़ी पहुंची फेयरी क्वीन अपने साथ 50 सवारियों को लेकर आई थी। इनमें इंडियन स्टीम रेलवे सोसायटी के सदस्य व विदेशी सैलानी शामिल थे। रेवाड़ी प्लेटफार्म पर उतरकर ये सभी लोग सीधे हेरीटेज लोकोशेड पहुंचे। लोकोशेड में इन लोगों ने भाप के इंजनों को देखा तथा उनके इतिहास के बारे में भी जानकारियां जुटाई। इंडियन स्टीम रेलवे सोसायटी के सदस्य जेएल ¨सह बताते हैं कि वर्ष 1997 में फ्रेंड्स ऑफ नेशनल रेल म्युजियम के नाम से सोसायटी बनाई गई थी। इस सोसायटी में रेलवे से बाहर के लोगों को भी सदस्य बनाया गया था।

वर्ष 2002 में दिल्ली के रेलवे म्युजियम के उस समय निदेशक रहे अश्वनी लोहानी ने इस सोसायटी का नाम बदलकर इंडियन स्टील रेलवे सोसायटी कर दिया। उन्होंने बताया कि इस सोसायटी से जुड़े सदस्यों का दिल्ली के नेशनल रेलवे म्युजियम में नेशनल स्टीम कांग्रेस सम्मेलन होता है। शनिवार को सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद सोसायटी के सदस्य अब लोकोशेड देखने के लिए पहुंचे है।

1853 में बने ऐतिहासिक फेयरी क्वीन इंजन का जलवा आज भी बरकरार है। फेयरी क्वीन में सवार होकर आए सैलानियों के साथ ही रेलवे स्टेशन पर मौजूद लोगों में इस इंजन के साथ सेल्फी लेने की जैसे होड़ मची हुई थी।