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पंचायत ने किया विरोध ,हरियाणा के गांवों में नहीं बिकेगी शराब

हरियाणा में करीब दो दशक पहले हुई शराबबंदी के बाद सरकार एक बार फिर नया प्रयोग करने की तैयारी में है। इस बार सरकार गांवों में शराब की बिक्री नहीं करेगी। यदि ग्राम पंचायत लिखित में सरकार से अपने यहां शराब ठेका नहीं खोलने का आग्रह करेगी, वहां शराब ठेके अलाट नहीं किए जाएंगे। सरकार के इस निर्णय से राजस्व का बड़ा नुकसान होने की आशंका है।

प्रदेश में करीब 6800 गांव हैैं, जिनकी छह हजार ग्राम पंचायतें काम करती हैैं। हर साल मार्च में नए वित्तीय वर्ष के लिए शराब ठेकों की नीलामी होती है। राज्य में यह काम पिछले कई सालों से ऑनलाइन हो रहा है। शराब ठेकों के आवंटन की प्रक्रिया के बाद हर साल ग्राम पंचायतें और महिलाएं अपने यहां शराब ठेके खोलने का विरोध करती हैैं। लिहाजा सरकार ने वर्ष 2018-19 की आबकारी पालिसी जारी करने से पहले ही उन ग्राम पंचायतों से आवेदन मांग लिए हैैं, जो अपने यहां शराब ठेका नहीं खुलने देना चाहती हैैं।

इन पंचायतों को 31 दिसंबर 2017 तक आबकारी एवं कराधान विभाग के पास ठेका नहीं खोलने का आवेदन करना होगा। यह आवेदन जिला स्तर पर किए जाएंगे, जो पूरे प्रदेश से मुख्यालय तक पहुंचेंगे। इसके बाद किसी आवेदन पर विचार नहीं होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बिहार के पटना में प्रवासी हरियाणा सम्मेलन के दौरान ऐसी सभी पंचायतों के आवेदनों पर गंभीरता से गौर करने की घोषणा की है, जो लिखित में अपने यहां शराब ठेका नहीं खोलने का आग्रह करेंगी।