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पैंतीस अन्य वार्डनों के हो सकते हैं दबादले

भोंडसी जेल में बंद कैदियों व गैंगस्टरों के हिमायती बनने वाले 35 अन्य वार्डन के भी तबादले हो सकते हैं। जेल की व्यवस्था सुधारने में लगे आइजी (जेल) जगजीत ¨सह ने इनके नाम अपनी रिपोर्ट में दर्ज कर डीजी (जेल) डा. केपी ¨सह को भेज दी है। डीजी से हरी झंडी मिलते ही वार्डनों की तबादला सूची जारी कर दी जाएगी। सूची में दर्ज दस नामों के खिलाफ विभागीय जांच भी होगी। क्योंकि इन्हें नियमों को ताक में रख कैदियों की तीमारदारी करने के आरोप लगे हैं। अन्य जो नाम हैं वे कई सालों से एक ही जगह पर जमें हुए थे। इससे पहले बीस वार्डन भोंडसी से दूसरी जेल में भेजे जा चुके हैं।

बंदियों पर नजर रखने वाले वार्डन उन्हें मोबाइल व अन्य सुख सुविधा मुहैया कराते थे। आइजी ने पंद्रह दिन के सर्च अभियान में जेल से करीब 256 मोबाइल व सात सौ से अधिक मोबाइल सिम बरामद किए हैं। बैरक की फर्स से जेल खेतों में पाइप डालकर उसमें मोबाइल सुरक्षित रखे जाते थे। जेल परिसर के खेतों में जब कैदी काम करने जाते थे तो वहां काम कम मोबाइल पर बात अधिक की जाती थी।

घर से चार्ज कर लाते थे बैट्री

अधिकतर मोबाइल के साथ दो बैट्री पाई गई। बताते हैं कि बैट्री भी कुछ वार्डन ही अपने ठिकाने से चार्ज कर लाते थे। एक बार चार्ज करने के पचास से सौ रुपये लिए जाते थे। यही नहीं नेट पैक भी कुछ वार्डन ही डलवाते थे।

सिफारिश के बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआइआर

आइजी जगजीत ¨सह भले ही काफी हद तक जेल की व्यवस्था सुधार चुके हों, मगर अधिकारियों का एक वर्ग ऐसा भी है जो कानून तोड़ने वाले वार्डनों को बचाने में लगे हुए हैं। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कपड़ों में छिपा कर मोबाइल लाने वाली महिला तथा खुद को जेल मंत्री का करीबी बताने वाले वार्डन के खिलाफ अभी तक एफआइआर नहीं दर्ज हुई है। जबकि आइजी ने मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी। यहां तक कि जेल में आकर जेल मंत्री ने भी सफाई दी थी कि उनका कोई परिजन वार्डन नहीं है।

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हम गलत कुछ भी नहीं होने देंगे। जिसका भी दोष मिल रहा है मुख्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में जानकारी दे रहे हैं। कुछ अन्य वार्डन भी दूसरी जेल में भेजे जाएंगे।