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3 साल बाद फिर बंदर पकड़ने शुरू फिरोजपुर के जंगलों में छोड़ेगी टीम

झज्जरनगर पालिका ने शहर से बंदर पकड़ो अभियान शुरू कर दिया है। करीब तीन साल बाद शुरू हुए इस अभियान से शहर के लोगों को उपद्रवी बंदरों से मुक्ति मिलने की उम्मीद बनी हुई है। नपा के द्वारा शनिवार को 50 बंदर पकड़े गए थे। 

यह भी बता दें कि नपा पिछले 6 माह से बंदर पकडऩे का ठेका छोड़ रही थी,लेकिन कोई भी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहा था। नपा ने प्रति बंदर एक हजार रुपए का रेट भी तय कर दिया था। अब एक पखवाड़े पहले ही जब नपा ने कम से कम रेट पर बंदर पकड़े जाने का टेंडर लगाया तो जयपुर की एजेंसी ने इसे 680 रुपए में लिया। शुक्रवार को नपा ने एजेंसी को वर्क आर्डर दिया। इसके बाद एजेंसी से जुड़ी टीम ने सबसे पहले लघु सचिवालय से और गुरुग्राम रोड से 50 बंदर पकड़े। इसी प्रकार रविवार को शहर के आदर्श नगर, पुराने बस स्टैंड,पुराना बीकानेर चौक पर पिंजरे लगाए गए। इसके बाद चालीस बंदर पकड़ लिए गए। हर बंदर की गिनती नपा के मौके पर मौजूद कर्मचारी ने की। 

अब सोमवार को बंदर पकड़ने का अभियान धीमा पड़ सकता है,क्योंकि पकड़े गए सभी बंदर फिरोजपुर झिरका के जंगलों में छोडऩे के लिए टीम रवाना होगी। यहां भी नपा का कर्मचारी मौजूद रहेगा। नपा ने इससे पहले नपा के कर्मचारियों से सर्वे कराकर झज्जर के सभी वार्डों उन्नीस वार्डों में एक हजार बंदर के होने की रिपोर्ट दी थी। सबसे ज्यादा उपद्रव पुराने बस स्टैंड,मेन बाजार,लघु सचिवालय,बहादुरगढ़ रोड, दिल्ली गेट सिलानी गेट पर है। 

680 प्रति बंदर का 

ठेका दिया है नपा ने 

यहभी बता दें कि नगर पालिका ने जयपुर की एक एजेंसी को 680 प्रति बंदर पकडऩे का ठेका दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि बंदर पकड़े जाने से लेकर इनके खानपान और कलेसर समेत अन्य जंगलों में छोड़े जाने की जिम्मेदारी इसी रेट पर रहेगी। एजेंसी ने नपा का यह तर्क मान लिया है। 

नपाकर्मी रहेगा टीम के साथ 

^बंदरपकड़ने का अभियान शुरू होने के साथ ही पकड़े गए सभी बंदरों की टैगिंग भी कराई जा रही है, ताकि एजेंसी की टीम पकड़े गए बंदरों को फिर से पकड़ा हुआ दिखा दे। हमारा एक कर्मचारी भी टीम के साथ अटैच कर दिया गया है। जब तक शहर भर से बंदरों का सफाया नहीं होता,अभियान जारी रहेगा। -भारतभूषण शर्मा,एमई नपा झज्जर