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गुरमत समागम में उमड़े श्रद्धालु, नतमस्तक होकर मांगी मन्नतें

अंबाला: गटां लंगीया ते रसता पहाड़ दा, तुरे जांदे गुरां दे लाल जी, सरसा नदी ते बिछोड़ा पै गया, उस वेले दा सुण लओ हाल जी.. आदि शब्दों से परमप्रीत ¨सह आलमपुर वालों ने संगतों के समक्ष गुरु के साहिबजादों की कथा का बखान किया। यह मौका था रविवार को छावनी के मछौंडा में आयोजित दो दिवसीय सालाना गुरमत समागम के अंतिम दिन का। जोकि श्री गुरु गो¨बद ¨सह के चार साहिबजादों की याद में करवाया जा रहा है।

गुरमत समागम के पंडाल में गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप को आकर्षक अंदाज में सजाया गया था। जिनके समक्ष गांव शाहपुर, नन्हेड़ा, शाहपुरा, दुखेड़ी, उगाड़ा व आसपास के गांवों से पहुंची संगतों ने नतमस्तक होकर परिवार की सुख-शांति के लिए मन्नतें भी मांगी। समागम में अरदास के बाद रागी व कीर्तन जत्थों ने साहिबजादों की शहादत का अपने अंदाज में बखान किया। समागम में हरबंस ¨सह रवालों वाले, मीरी-पीरी जत्था जगाधरी के बच्चों, भाई परमजीत ¨सह खालसा पंजोखरा व अन्य ने गुरु संगतों को निहाल किया। जबकि समागम में जहां अमृत संचार करवाया गया, वहीं श्रद्धालुओं को दस्तार बंदी भी सिखाई गई। संगतों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ बैठकर समागम में गुरु कीर्तन को सुना। वहीं आदेश मेडिकल अस्पताल द्वारा नि:शुल्क जांच शिविर भी लगाया गया। जिसमें विशेषज्ञों ने संगतों का चैकअप किया और मरीजों को दवाइयां भी वितरित की गई। समागम के दौरान संगतों को अटूट लंगर बरताकर प्रसाद भी वितरित किया गया। इस मौके पर शिरोमणी कमेटी के सदस्य व जत्थेदार हरपाल ¨सह, सतवंत ¨सह ढींढसा व अन्य ने रागी व कीर्तन जत्थों को सिरोपा देकर सम्मानित किया।