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गीता जन्म स्थली की पावन धरा भक्ति और मुक्ति का मार्ग : हेमा मालिनी

 

मथुरा से सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा कि गीता स्थली कुरुक्षेत्र की पावन धरा भक्ति और मुक्ति का सबसे पवित्र स्थल है। इस पावन धरा से 5 हजार वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता के उपदेश देकर विश्व को मानवता का संदेश देने का कार्य किया। इन उपदेशों का युवा पीढी को अनुसरण करना चाहिए।

 

अभिनेत्री हेमा मालिनी गांव ज्योतिसर के पास स्थित निर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर परिसर में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। इससे पहले विधायक सुभाष सुधा, भाजपा के युवा नेता साहिल सुधा व इस्कॉन मंदिर के संचालक साक्षी गोपाल के अनुरोध करने पर इस्कॉन मंदिर में पूजा अर्चना करने और ब्रह्मसरोवर का अवलोकन करने के लिए पहुंचीं।

अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में दूसरी बार एक कलाकार के रूप में पहुंची हैं। यह महोत्सव हरियाणा का बहुत बडा पर्व है और यह पर्व देश के अन्य पर्वो से भी बहुत बड़ा महोत्सव है। यह महोत्सव कलाकारों को एक मंच देने का काम कर रहा है। इसी पावन धरा पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को 5 हजार वर्ष पूर्व गीता का संदेश देकर पूरे विश्व को एक नई राह दिखाने का कार्य किया। इसलिए कुरुक्षेत्र की भूमि पूरे विश्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण स्थल है। इस भूमि पर आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सौभाग्यशाली है। इस पावन धरा से भक्ति और मुक्ति का मार्ग मिलता है।

उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की भूमि पर पहुंचते ही सुंदर एहसास होता है और इस महोत्सव के साथ-साथ गीता उपदेशों के लिए कुरुक्षेत्र को पूरे विश्व में जाना जाता है। इस महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा देकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक सराहनीय कार्य किया है। इसको हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्णा के कारण इस्कॉन संस्था से काफी नजदीक से जुड़ाव है और कुरुक्षेत्र की भूमि पर अर्जुन कृष्ण मंदिर स्थापित किया जा रहा है।

विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि गीता महोत्सव में दूसरी बार फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी पहुंची है, उनका महोत्सव और कुरुक्षेत्र के साथ खासा लगाव है। अभिनेत्री हेमा मालिनी को विशाल रथ और ब्रह्मसरोवर मन को भा गया है। इस मौके पर मुम्बई से आई प्रभा, मिठुल पाठक, इस्कॉन प्रोजेक्ट निदेशक प्रिया गो¨वद, सतपाल शर्मा, शमशेर ¨सह, दीपक कैथल, जगत शास्त्री, सत्यपति दास, गो¨वद कृष्णा दास प्रमुख रूप से मौजूद थे।