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रोजगार के बड़े डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है केपीओ

गुरुग्राम नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ) सेक्टर का दायरा देश भर में तेजी से व्यापक होता जा रहा है। यही कारण है कि इस क्षेत्र की कंपनियों में युवाओं को जॉब मिलने की प्रक्रिया में तेजी आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले एक से डेढ़ सालों में देश भर की केपीओ कंपनियों में तीन लाख से अधिक नई नौकरियां युवाओं के लिए उपलब्ध होंगी। इसमें से 50 फीसद से भी अधिक जॉब दिल्ली-एनसीआर की कंपनियों के पास होगा। माना जा रहा है कि यहां के प्रबंधन, इंजीनिय¨रग सहित अन्य संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं को यह नौकरियां मिलेंगी। आने वाले कुछ समय में रोजगार देने के मामले में केपीओ, बीपीओ कंपनियों को पीछे छोड़ देगा।

केपीओ का क्रेज और दायरा कितना बढ़ रहा है यह बात किसी से छिपी नहीं है। गुरुग्राम ही नहीं नोएडा, हैदराबाद, बेंगलुरू, पुणे और मुंबई जैसे आइटी-बीपीओ हब में भी केपीओ का विस्तार होता जा रहा है। प्राइम कॉल इंटरनेशनल की एचआर डायरेक्टर विनीता यादव का कहना है कि बड़े-बड़े बीपीओ भी अब केपीओ की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि यहां भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। गुरुग्राम इसका नायाब उदाहरण है। जेनपैक्ट, एचसीएल, आइबीएम व टीसीएस जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां भी खुद के कदम तेजी से केपीओ की ओर बढ़ा रही हैं। बीपीओ के क्षेत्र में नए निवेश आने के स्थान पर केपीओ की ओर ही जा रहे हैं। यही समय की मांग है। इस बिजनेस मॉडल के तेजी से आगे बढ़ने का सबसे अधिक लाभ युवाओं को होगा क्योंकि यही वह सेक्टर है जो उनके लिए रोजगार का द्वारा खोलेगा।

केपीओ में नौकरी उन्हीं युवाओं नौकरी मिलने की संभावना बलवती होती है जिनमें किसी चीज के गहन विश्लेषण की दक्षता हो। उनके अंदर अपने काम को लेकर गहराई से समझ हो। केपीओ में काम करने वालों को बिजनेस के बारे में विशेष जानकारी होनी चाहिए। वित्तीय व धन संबंधी मामलों के विशेष ज्ञान के साथ फाइनेंशियल मॉडल बनाने दक्षता भी होनी चाहिए। इसके अलावा टेलीकॉम, मीडिया, टेक्नोलॉजी, इंश्योरेंस, बैं¨कग और फूड एंड बेवरेज के क्षेत्र का ज्ञान होना चाहिए।

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देश में केपीओ के प्रमुख क्षेत्र: गुरुग्राम, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरू, कोलकाता, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे व नासिक। नासिक में डब्ल्यूएनएस ने रिसर्च सेंटर खोल रखा है।

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क्या है केपीओ: केपीओ बीपीओ का और विस्तृत क्षेत्र है। यह बीपीओ को नॉलेज प्रोसेस की ओर ले जाता है। केपीओ क्लाइंट को सिर्फ उनके ढांचागत दायरे में ही अपनी सेवाएं नहीं देता बल्कि वह इसमें सुधार भी करता है। यह क्लाइंट को यह भी बताता है कि वह इस सेवा को और बेहतर कैसे बना सकता है। इससे ज्ञान और अनुभव आधारित सेवा भी शामिल होती है।

यह समय केपीओ का ही है। इस क्षेत्र में रोजगार और कारोबार की ²ष्टि से संभावनाएं भी भरपूर हैं। देश में केपीओ कारोबार 12 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है। इसमें दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी साढ़े चार बिलियन तक हो सकती है। यहां रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। केपीओ का विस्तार केवल टीयर-1, टीयर-2 ही नहीं टीयर-3 शहरों में भी हो रहा है।