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मेले में बिखरेगी लखनऊ और बनारस घराने की महक

फरीदाबाद : नए वर्ष में 2 फरवरी से शुरू होने वाले 32वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में लखनऊ और बनारस घराने की महक बिखरेगी। कथक, चरकुला, राई नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे तो सूफियाना कलाम की महफिल भी जमेगी। देश-विदेशी पर्यटकों को लोक नृत्यों से कलाकार उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक परिवेश का अहसास कराएंगे।

उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है। कार्यक्रमों की रूपरेखा को लेकर उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य विभाग के अधिकारियों के बीच विचार विमर्श चल रहा है, लेकिन यह तय है कि मेले में लखनऊ और बनारस घराने से जुड़े कलाकार रंग जमाएंगे। मथुरा, वृंदावन के कलाकारों के अलावा कथक, चरकुला तथा राई नृत्य में महारत हासिल करने वाले नर्तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

चरकुला नृत्य ब्रज के कलाकारों द्वारा किया जाता है। यह एक तरह से घड़ा नृत्य है। इस नृत्य के दौरान बैलगाड़ी या रथ के पहिये पर कई घड़े रखे जाते हैं, फिर उन्हें सिर पर रखकर नृत्य किया जाता है। ऐसे ही राई नृत्य बुंदेलखंड से जुड़ा है, वहां की महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह नृत्य मयूर की तरह किया जाता है, इसीलिए इसे मयूर नृत्य भी कहते हैं। उत्तर प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य विभाग मेले में लोक नृत्यों की प्रस्तुति पर खास ध्यान देगा।

हमारा प्रयास उत्तर प्रदेश की संस्कृति को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच पर दर्शाने का है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान लोक नृत्य खासतौर से प्रस्तुत किए जाएंगे। हम सूरजकुंड मेले में लखनऊ और बनारस घराने से जुड़े कलाकारों को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुति का मौका देंगे।