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औद्योगिक नगरी में एचआइवी पॉजीटिव मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या

यमुनानगर : औद्योगिक नगरी में एचआइवी पॉजीटिव व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और अन्य सामाजिक संस्थाओं की इस दिशा में जागरूक किया जाता है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक जागरूकता अभियानों का असर दिखाई नहीं दे रहा है।

विभागीय जानकारी के मुताबिक 2007 में एचआइवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 29 थी, जबकि 2014 में संख्या बढ़कर 350 पर पहुंच गई। हैरानी की बात है कि ग्रसित मरीजों की संख्या की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद जांच की व्यवस्था जिला स्तर पर नहीं है। परामर्श केंद्र अवश्य हैं, लेकिन जांच केंद्र न होने कारण रोहतक या चंडीगढ़ पीजीआइ की दूरी तय करना मजबूरी है। लक्षणों के आधार पर संबंधित व्यक्ति को पीजीआइ का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसे में ग्रसित व्यक्तियों की मुसीबतें और भी बढ़ जाती हैं। जिले में एड्स की पुष्टि करने के लिए कोई जांच केंद्र की व्यवस्था नहीं है। जगाधरी, यमुनानगर, रादौर, खिजराबाद और साढौरा में परामर्श केंद्र बनाए गए है, जिन पर न तो एड्स की पुष्टि करने के लिए जांच करने का कोई साधन है और न उपचार के पुख्ता प्रबंध हैं।

यमुनानगर-जगाधरी में हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। इस जिले की सीमा उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल सटा हुई है और बड़ी संख्या में बिहार, पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल और नेपाल से श्रमिक कार्य करते हैं। इन श्रमिकों में एड्स से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक पाई गई है। जागरूकता के अभाव के कारण स्थिति अधिक खराब देखी जा रही है। असुरक्षित यौन संबंध बीमारी का मुख्य कारण माना जाता है। इसके अतिरिक्त नशे की लत भी एड्स का कारण बन सकती है।

एचआइवी पॉजीटिव व्यक्तियों की संख्या बढ़ी है। बीमारी से बचाव के लिए एहतियात बरतना निहायत जरूरी है। लोगों में जागरूकता का अभाव है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं एचआइवी पॉजीटिव व्यक्तियों की संख्या बढ़ी है। बीमारी से बचाव के लिए एहतियात बरतना निहायत जरूरी है। बचाव ही एड्स का उपचार है। ग्रसित मरीजों को अस्पताल में नियमित रूप से दवाई दी जाती है।