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ई-रजिस्ट्री लागू होने के बाद भी प्राॅपर्टी के हजारों इंतकाल पेंडिंग

प्राॅपर्टीकी ई-रजिस्ट्री (ऑनलाइन) होने के बाद भी जिले में हजारों की संख्या में इंतकाल आज भी पेंडिंग हैं। इंतकाल दर्ज कराने के लिए लोग तहसीलों के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। उन्हें अगले हफ्ते आने की बात कहते हुए टरकाया जा रहा है। सीएम मनोहरलाल ने तहसीलों में पेंडेंसी खत्म करने के लिए कई बार निर्देश दिए हैं, बावजूद इसके हर तहसील में काफी केस पेंडिंग हैं। इसी के मद्देनजर डीसी अमित खत्री ने जिले के राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों, तहसीलदारों नायब तहसीलदारों को अपने-अपने आॅफिस के सभी पेंडिंग इंतकाल दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं। विशेष बात यह है कि केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह उनकी विधायक प|ी प्रेमलता के गृहक्षेत्र उचाना तहसील के जिले में सबसे ज्यादा इंतकाल की 1121 फाइलें पेंडिंग हैं। 

जिले में पहले एक माह में दो दिन तहसीलदार को इंतकाल दर्ज के मामले निपटाने होते थे। डीसी के आदेश के बाद अब जिले की सभी सातों तहसीलों में प्रतिमाह चार दिन बैठकर तहसीलदारों को इंतकाल दर्ज करने की कार्रवाई करनी होगी। यानि सप्ताह में एक दिन इसके लिए फिक्स होगा। ज्यादातर तहसीलों में इसके लिए शुक्रवार का दिन निर्धारित किया गया है। इस पर राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कवायद शुरू कर दी है। 

^जिले में ऑनलाइन रजिस्ट्रियां इंतकाल किए जाते हैं। अब तहसीलदार हर माह चार दिन इंतकाल दर्ज करने की कार्रवाई करेंगे, ताकि पेंडेंसी रहे। जो पेंडेंसी हैं वो या तो तहसीलदार होने की वजह से हैं या फिर नई रजिस्ट्रियों की हैं। उचाना तहसील में तहसीलदार पद खाली रहने से वहां पर काफी इंतकाल पेंडिंग रह गए थे। -रामफलकटारिया, जिला राजस्व अधिकारी, जींद। 

^मैंने पिछले वर्ष कुछ जमीन की खरीद-फरोख्त की थी। मगर अब तक जमीन का इंतकाल दर्ज नहीं किया जा चुका है। काफी महीने तो तहसीलदार होने की बात कही गई और अब अगले हफ्ते करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। हर हफ्ते चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सरकार केवल सुविधा का हवाला दे रही है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दे रही। -नत्थूराम,प्रॉपर्टी क्रेता। 

जिले में सभी तहसीलों में खाली पड़े तहसीलदार अन्य कर्मचारियों के पद जल्द भरे जाएं। जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों को समय-समय पर तहसीलों में औचक निरीक्षण कर लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। सभी तहसीलों में कंप्यूटर सिस्टम इंटरनेट सुविधाएं सुचारू रूप से चलवाई जाएं। 

^मैंने करीब डेढ़ साल पहले एक प्लॉट खरीदा था और तहसील में रजिस्ट्री कराई थी, लेकिन आज तक मेरे नाम प्लॉट का इंतकाल दर्ज नहीं हो सका है। पटवारी बार-बार चक्कर कटवा रहा है। कभी कहता है तहसीलदार साहब नहीं आए। कभी कहता है सिस्टम नहीं चल रहा। ऐसे में वे परेशान हैं। तहसीलों में तो बिना पैसे दिए कुछ काम नहीं होता। -रामकिशन,प्रॉपर्टी क्रेता। 

जिले में तहसीलदारों उनके कार्यालयों में स्टाफ की कमी होना, लगे सिस्टम सुचारू रूप से चलना, पटवारियों की कमी कुछ पटवारियों द्वारा फाइल को लटकाए रखना मुख्य कारण हैं। इससे जिले में इंतकाल रजिस्ट्रियां पेंडिंग हैं। कई पार्टी रजिस्ट्री कराने के बाद तहसील में इंतकाल दर्ज कराने के लिए नहीं पहुंचती। 

जमीन जायदाद के मामलों में रोजाना धोखाधड़ी फर्जीवाड़े के मामले उजागर हो रहे हैं। एक-एक प्लॉट को कई कई खरीदारों को बेचकर लोगों को ठगा जा रहा है। पुलिस विभाग द्वारा ऐसे मामलों में हर माह लगभग 8 से 10 एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अगर रजिस्ट्री होते ही प्लॉट अन्य प्रॉपर्टी का इंतकाल दर्ज किए जाए तो फर्जीवाड़े की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाती है।