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उज्जैन में तय होगा शिक्षा का भारतीय प्रारूप

 रेवाड़ी: सब कुछ सही रहा तो आने वाले समय में गुरु-शिष्य की परंपरा को पुर्नस्थापित करते हुए भारत एक बार फिर सही मायने में शिक्षा के क्षेत्र में विश्वगुरु का तमगा हासिल करेगा। जी हां, वर्ष 2018 शिक्षा नीति में बड़े बदलाव का होगा।

नए साल में नेपाल व इंडोनेशिया सहित देश-विदेश के 1200 गुरुकुल मिलकर शिक्षा का भारतीय प्रारूप तैयार करेंगे। अप्रैल 2018 में धर्म नगरी उज्जैन में विराट गुरुकुल सम्मेलन से इसका आगाज होगा। हरियाणा व पंजाब सहित विभिन्न राज्यों से जुड़े भारतीय शिक्षण मंडल के पदाधिकारी विश्व में अपनी किस्म के इस अनूठे आयोजन की तैयारी में जुट गए हैं।

आयोजन का कैलेंडर पांच माह पहले जारी हो चुका है। 28 से 30 अप्रैल तक प्रस्तावित इस सम्मेलन में भारत व नेपाल के सात-सात गुरुकुल सह आयोजक की भूमिका में हैं। सम्मेलन में आरएसएस सहित देश के कई लब्ध प्रतिष्ठित संगठनों के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे।

एक ही छत के नीचे एकत्रित होने वाले गुरुकुल प्रतिनिधि व शिक्षाविद् गुरु-शिष्य परंपरा के अतीत बनने के कारणों व गुरुकुल शिक्षा पद्धति को मुख्यधारा की शिक्षा पद्धति बनाने के उपायों पर मंथन करेंगे। हरियाणा से भी बड़ी भागीदारी रहेगी।