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एसए जैन स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के आदेश

अंबाला शहर : एडिड स्कूल होने के बावजूद विद्यार्थियों से मनचाही फीस वसूलने के मामले में एसए जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रबंधन फंस गया है। शिक्षा निदेशालय ने 29 नवंबर को शहर की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में शामिल एसए जैन सीसे स्कूल प्रबंधन समिति के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने का आदेश जारी कर दिया है। डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन ने इस बारे में 29 नवंबर को आदेश जारी कर जिला शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई करने का निर्देश दे दिया है। ऐसे में अब किसी भी समय स्कूल प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज होना तय है। इस मामले में निदेशक ने डीईओ अंबाला को सीधे तौर पर एसपी अंबाला से मिलकर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए कहा है।

मामला 2008-09 से चल रहा है। उस समय नीरज बाली ने बैलेंसशीट दायर कर शिक्षा निदेशालय में शिकायत दी थी कि एसए जैन स्कूल में मनमानी फीस वसूली जा रही है। साथ ही इस पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस मामले में निदेशालय ने स्कूल प्रबंधन को दोषी पाया था। वर्ष 2015 में उप निदेशक बीआर वत्स ने स्कूल के खिलाफ मामला दर्ज कराने के आदेश दे दिए थे, लेकिन स्कूल ने हाईकार्ट से स्टे ले लिया। बताया कि वह माइनोरिटी संस्थान है। सरकार ने मई 2017 में स्कूल के दावे को खारिज कर दिया। अलबत्ता, स्कूल प्रबंधन ने कोर्ट में हार मानने से पहले खुद ही केस वापस लेने में समझदारी दिखाई। कोर्ट से मामला वापस हो गया इसीलिए फिर से स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।

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स्कूल की मान्यता भी हो सकती है रद

बता दें कि एक ही स्कूल परिसर में तीन स्कूल चलाने के मामले में भी स्कूल प्रबंधन घिरी हुई है। एसए जैन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एसए जैन विजय वल्लभ स्कूल और एसए जैन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल तीन स्कूल एक ही परिसर में अलग-अलग नाम से चलाए जा रहे हैं। इसी मामले में स्कूल में प्रशासक भी नियुक्त किया गया था। ऐसे में इस मामले में भी स्कूल के खिलाफ कभी भी कार्रवाई करते हुए निदेशालय इसकी मान्यता भी रद्द कर सकता है। इन तीनों स्कूलों में करीब 3700 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऐसे में इन बच्चों का भविष्य भी अब प्रबंधन ने दांव पर लगा दिया है।

वर्ष 2008-2009 में शिक्षा निदेशालय में नीरज बाली ने कहा था कि एसए जैन स्कूल में अधिक फीसें ली जा रही हैं। बच्चों के पैसे का गलत इस्तेमाल करने की भी शिकायत दी गई थी। इसमें 70 लाख रुपये विजय वल्लभ और दस लाख श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ को दिया गया है। इस मामले की जांच के बाद प्रबंधन ने कोर्ट से स्टे ले लिया था। क्योंकि उस समय भी सुदेश जैन मैनेजमेंट में प्रधान थे और आज भी प्रधान के पद पर कार्यरत हैं, इसलिए दोबारा मैनेजमेंट आने पर इन्होंने कोर्ट से केस वापस ले लिया था। मामला शिक्षा निदेशालय में विचाराधीन थी। अब निदेशालय ने सुनवाई कर मौजूदा मैनेजमेंट के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है।