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ज्ञान और परंपरा को साथ लेकर चलने की सीख देती है गीता : धनखड़

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ का कहना है कि गीता महोत्सव किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरी मानव जाति के लिए एक उत्सव है जिसे पूरे प्रदेश में भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। गीता व्यक्तित्व विकास का ग्रंथ है जिसमें जीवन का सार गर्भित विवरण दिया गया है। युवाओं को गीता पाठन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने की सीख हमें गीता से मिलती है। ज्ञान और परंपरा को साथ लेकर चलने के बारे में गीता के 18 अध्यायों में विस्तार से बताया गया है जो कि मनुष्य जीवन के विकासात्मक बदलाव में बेहतर कदम है। यह बात उन्होंने गीता जयंती महोत्सव के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम की शुरूआत धनखड़ ने दीप प्रज्ज्वलित करते हुए की। इस उपरांत उन्होंने वहां लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रत्येक स्टॉल पर जाकर उत्पादों, उपलब्धियों व कलाकृतियों के बारे में विस्तृत जानकारी ली।

कृषि मंत्री ने कहा कि गीता हमें संदेश देती है कि समाज में स्त्री का सम्मान हो। समाज में जातिवाद का भेद खत्म हो। गीता हमें गुस्सा सहन करने की शक्ति देती है साथ गीता हमें गुस्सा पालना भी सिखाती है। द्रोपदी ने 13 वर्ष तक अपमान होने पर गुस्से को सहन किया। महात्मा गांधी, शहीद उद्यम ¨सह, चाणक्य जैसे महापुरूषों ने अपने साथ हुए अपमान को गुस्से के साथ दिया और समाज व और देश बदलने का काम किया। हमारा ध्येय बड़ा होना चाहिए , अच्छा होना चाहिए और सर्वोपरि रहना चाहिए यह संदेश हमें गीता से मिलता है। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त सुशील सारवान, जिप चेयरमैन परमजीत सौलधा, वाइस चेयरमैन योगेश सिलानी, नप चेयरमैन कविता नंदवानी, भाजपा महिला ¨वग की जिलाध्यक्ष सुनीता धनखड़, आनंद सागर, सहित जिला के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

उपायुक्त सोनल गोयल ने मुख्य अतिथि कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ का स्वागत किया और तीन दिवसीय गीता महोत्सव की रूपरेखा से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अगर हम गीता में वर्णित बातों को आचरण में लाएंगे तो हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ जाएगा। उन्होंने कहा कि गीता हमें नैतिक मूल्यों के साथ जीना सिखाती है। हमारी युवा पीढ़ी खासकर छात्र गीता के मूल्यों को जीवन में आत्मसात कर आगे बढ़ेगा तो निश्चित रूप से प्रदेश और देश के निर्माण में सहयोग मिलेगा। भारतीय संस्कृति नारी के सम्मान की रही है। नारी शिक्षा को बढ़ावा देकर हम गीता के मूल्यों का समाज में समावेश कर सकते हैं।