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आबोहवा नहीं सुधरने से परेशान हैं शहर के लोग

अक्टूबर से ही खराब हुई साइबर सिटी की आबोहवा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। इससे गुरुग्राम के बा¨शदे काफी परेशान हैं। हर किसी का यही सवाल है कि यहां हवा की गुणवत्ता कब सुधरेगी। दिनों दिन वायु प्रदूषण का मसला गंभीर होता जा रहा है।यह हर किसी के स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। आम आदमी ही नहीं शहर के उद्यमी भी प्रदूषण को लेकर काफी ¨चतित हैं। उनका कहना है कि इस मामले में सरकार और प्रशासन को उचित एक्शन प्लान बनाने की जरूरत है। अगर ऐसा ही माहौल अधिक दिनों तक चलता रहा तो स्थिति काफी भयावह हो जाएगी।

बुधवार को भी साइबर सिटी में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही। इसे 337 पीएम 2.5 दर्ज किया गया। लोगों का कहना है कि अक्टूबर से अभी तक एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब गुरुग्राम की आबोहवा दुरुस्त हुई हो। उद्योग जगत में प्रदूषण को लेकर काफी ¨चता है। इस ¨चता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी यूनियनों द्वारा कर्मचारियों को 30 हजार से अधिक मास्क बांटा गया। जिसे कंपनी प्रबंधन ने उपलब्ध कराया था। इसी प्रकार की ¨चता शहर के कई और औद्योगिक यूनिटों में देखा जा रहा है।

गुरुग्राम में 11 हजार से अधिक औद्योगिक यूनिट हैं। यह सभी ऐसी यूनिटें हैं जो मानक से अधिक उत्सर्जन नहीं करती हैं। फिर भी इस प्रकार की स्थिति लोगों के समझ से परे है। उद्यमियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदूषण से निपटने के लिए उद्योगों में पेट कोक, फर्नेस आयल के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिसके बाद उद्योगों ने इससे दूरी बना ली है। फिर भी प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं दिखाई दे रही है। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि सरकार और प्रशासन को प्रदूषण से निपटने के लिए उचित एक्शन प्लान बनाना होगा। ऐसा नहीं होगा तो स्थिति दिनों दिन खराब होती जाएगी।

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उद्योग जगत पर्यावरण को लेकर काफी गंभीर है। गुरुग्राम की खराब आबोहवा हर किसी को परेशान कर रही है। इसे लेकर सरकार, प्रशासन ही नहीं समाज के हर वर्ग को जागरूक होने की जरूरत है। तभी इससे निपटा जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी हरियाली को बढ़ावा दिया जा रहा है।