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आठ के बजाय 24 घंटे हो रहा खनन, प्रशासन मौन

रादौर : यमुना नदी में अवैध खनन करने की शिकायतें करने के बावजूद खनन और ओवर लोड अधिकारियों, पुलिस व ठेकेदारों की मिली-भगत से रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मामले की शिकायत सीएम और खनन मंत्री से करने के बावजूद जठलाना क्षेत्र में यमुना नदी से अवैध खनन हो गया है। इसके विरोध में जठलाना और गुमथला क्षेत्र के लोग कई बार सड़क पर उतर कर सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके अवैध खनन नहीं रुक रहा है।

हरियाणा एंटी करप्शन सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट वरयाम ¨सह ने बताया कि अवैध खनन के विरोध में एक प्रतिनिधिमंडल 23 सितंबर को यमुनानगर में मुख्यमंत्री से मिला था। अब फिर प्रतिनिधिमंडल सबूतों के साथ चंडीगढ़ में जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर जठलाना क्षेत्र में यमुना नदी के घाटों पर हो रहे अवैध खनन का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएगा। नियमों के अनुसार यमुना नदी के घाट पर दिन में केवल आठ घंटे ही खनन किया जा सकता है, जबकि घाट के ठेकेदार 24 घंटे खनन करने में लगे हुए हैं। नियमों से अधिक खोदाई करने से तटबंध कमजोर होते जा रहे हैं। उससे बाढ़ आने पर जठलाना क्षेत्र के यमुना नदी किनारे बसे गांव के लोगों के आस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। ¨सचाई विभाग ने भी खनन विभाग को पत्र भेजकर इस बारे सचेत किया था कि ठेकेदार निमयानुसार खनन नहीं कर रहे हैं। उससे बाढ़ बचाव के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

वरयाम ¨सह ने बताया कि नियमानुसार घाट के ठेकेदारों को वर्ष में एक हजार पौधे लगाकर वातावरण को हरा-भरा करना था, परंतु ठेकेदारों ने ऐसा नहीं किया। क्षेत्र को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए हरी-पट्टी विकसित की जानी थी, जो नहीं की गई। इसके लिए विशेष बजट भी रखा गया था। क्षेत्र के लोगों को ध्वनि प्रदूषण से बचाने के लिए मशीनों की मुरम्मत और समयानुसार बंद करना शामिल था, लेकिन मशीनों के हर समय चलने से क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। जल प्रदूषण न हो इसके लिए खनन ठेकेदारों को हिदायत दी गई थी कि भूमिगत जलस्तर से ऊपर ही खनन करे, जबकि ठेकेदार पानी के अंदर खनन कर रहे हैं। उससे जल प्रदूषण हो रहा है। उससे क्षेत्र में जल प्रदूषण को कभी भी बड़ी बीमारी उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने बताया कि प्रथम वर्ष में घाट के ठेकेदारों को एक हजार पेड़ लगाने थे, जिनमें से आठ सौ पेड़ों को ¨जदा रखना अनिवार्य था।

पेड़ों की प्रजाति में नीम, आम, शीशम, सिरस, बबूल, गुलमोहर आदि शामिल थे। कुल पांच वर्षो में पांच हजार पौधे लगाने और चार हजार पौधों ¨जदा रखने का भी सरकार ने प्रावधान किया है। ये पौधे सड़कों के किनारे, स्कूल, सार्वजनिक इमारत और सामाजिक स्थानों पर यह पेड़ लगाने अनिवार्य है