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डीम्ड संस्थानों से डिग्री कर नौकरी पाने वालों पर लटकेगी तलवार

सिरसा। डीम्ड संस्थान से तकनीकी डिग्री लेकर नौकरी पाने वाले पर जल्द ही तलवार लटक सकती है। इस दायरे के अंदर नौकरी में तरक्की पाने वालों पर भी होगी। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हरियाणा में ऐसे डिग्रीधारकों की पहचान शुरू हो गई है।

इसके लिए तकनीकी शिक्षा विभाग के महानिदेशक की ओर से प्रदेश के तमाम राजकीय बहुतकनीकी संस्थानों को डीम्ड संस्थानों से तकनीकी डिग्री लेने वाले कर्मचारियों के नाम और पद की जानकारी देने के लिए कहा गया है।  उन कर्मचारियों ने जिस संस्थान या यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल की है, उसका ब्योरा भी मांगा गया है। ऐसी डिग्री के आधार पर कितने लोगों ने नौकरियां पाई हैं या नौकरी में तरक्की पाई है। इस डिग्री के आधार पर उन्हें नौकरी में कितना वेटेज दिया गया। ऐसे कर्मचारियों को कितनी एसीपी दी गई, अग्रिम इंक्रीमेंट के अलावा अन्य दिए गए लाभ का विवरण भी मांगा है।

सिरसा के अग्रसेन कॉलोनी निवासी व्हीसल ब्लोअर आरटीआइ कार्यकर्ता करतार सिंह ने डीम्ड यूनिवर्सिटी के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए वर्ष 2008 पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। दलील दी कि ऐसी संस्थान डिग्रियां बेचने का काम कर रही हैं। मामला उच्च न्यायालय में चला और वर्ष 2012 में उच्च न्यायालय ने प्रो. करतार सिंह के पक्ष में फैसला सुनाया।

इस फैसले के खिलाफ विभिन्न संसथानों और डिग्री धारकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की। प्रो. करतार ङ्क्षसह के खिलाफ 90 लोगों ने सांझी अपील की। सर्वोच्च न्यायालय में लंबी सुनवाई के बाद फैसला डीम्ड संस्थान के खिलाफ आया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को यथावत रखा। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से देशभर में असर होना तय है। इस दिशा में हरियाणा सरकार ने इसकी शुरुआत कर दी है।