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बगावत बनाएगी राजपूतों का सिरमौर

रेवाड़ी:पद्मावती फिल्म पर विवादित बयान देकर सुर्खियों में आए भाजपा नेता सूरजपाल अम्मू को अपनी बयानबाजी पर किसी तरह का पश्चाताप नहीं है। उन्हें पता था कि जिस राह पर वे आगे बढ़ रहे हैं उस पर चलते हुए 'ए पार्टी विद डिफरेंस' में जगह बरकरार रखना मुश्किल होगा। इसी कारण उन्होंने शुरूआत में कुछ सावधानी बरती, लेकिन चर्चित चेहरा बनते ही उनकी बड़ा राजपूत नेता बनने की महत्वाकांक्षा जाग गई। पिछले दिनों रेवाड़ी में भविष्य की रणनीति को लेकर हुई बैठक में ही उन्होंने संकेत दे दिए थे कि चुप नहीं बैठेंगे।

असल में सूरजपाल अम्मू पहले दोनों हाथों में लड्डू रखने की नीति पर चले। पार्टी की बजाय अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी के नाते उन्होंने अपनी बात कही, लेकिन पद्मावती के विरोध में पूरे देश से उठी आवाज ने उन्हें मुखर कर दिया। भाजपा उनके लिए गौण और समाज सर्वोपरि हो गया। रेवाड़ी के हंस रिसोर्ट में 28 नवंबर को हुई बैठक में वक्ताओं ने भाजपा के खिलाफ जमकर आग उगली। फिल्म पर प्रतिबंध न लगाने को लेकर मुख्यमंत्री मनोहरलाल निशाने पर रहे। उन्हें शेखावाटी का साथ मिला। सीकर से बड़ी संख्या में राजपूत प्रतिनिधि यहां पहुंचे थे।

यहीं भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ। अम्मू ने तीन केंद्रीय मंत्रियों गृहमंत्री राजनाथ ¨सह, जनरल वीके ¨सह व राज्यवर्धन ¨सह राठौड़ जैसे नेताओं को भी मौन रहने के लिए नसीहत दे डाली। उनकी निगाह अब भिवानी-महेंद्रगढ बेल्ट के छोटे दायरे पर पकड़ बनाकर हरियाणा का सर्वमान्य राजपूत नेता बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राष्ट्रीय स्तर पर उंची उड़ान का सपना देख रहे हैं।