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बनभौरी के श्रीदुर्गा माता प्राचीन शक्तिपीठ के अधिग्रहण का विरोध, रद्द करने की मांग

सरकारकी ओर से बनभौरी के श्रीदुर्गा माता प्राचीन शक्तिपीठ के अधिग्रहण करने के विरोध में सर्व ब्राह्मण समाज ने बुधवार को प्रदेश के शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।ज्ञापन में बनभौरी मंदिर के अधिग्रहण को तुरंत रद्द किए जाने की मांग की है। शिक्षामंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे। 

ज्ञापन में ब्राह्मण समाज ने कहा है कि गांव बनभौरी में श्री दुर्गामाता का अति प्राचीन मंदिर हैं। इसमें स्वयं श्री दुर्गा माता जागृत है। लगभग एक दर्जन से अधिक ब्राह्मण पुजारी परिवार स्थापना के समय से माता की सेवा पूजा अर्चना करते रहे हैं। 400 वर्ष पूर्व यह मंदिर स्थापित किया गया था। आसपास की पंचायतों ने हिंदू धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा भावना को देखते हुए मंदिर की जमीन को सन 1863 में दोहली के रूप में दान में दी थी। उक्त जमीन पर इस परिवार के मुखिया ने श्री दुर्गा माता की छोटी सी कच्ची मिट्टी की मढ़ी बनाई और अपने धर्म के प्रचार प्रसार में लग गए और वहां पर ग्रामीणों के सहयोग से शक्तिपीठ धाम स्थापित किया। इससे पहले भी पूर्व की हुड्डा सरकार ने इस मंदिर का अधिग्रहण कर लिया था लेकिन बाद में ब्राह्मण समाज के बढ़ते दबाव के कारण इस अधिग्रहण को रद्द कर दिया था। लेकिन अब सरकार ने इस मंदिर का अधिग्रहण कर लिया है। इससे प्रदेश के लाखों ब्राह्मण समाज के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस मंदिर में जहां 24 घंटे भंडारा चलता है वहीं निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह समारोह भी आयोजित करवाया जाता है। ब्राह्मण समाज मांग करता है कि सरकार इस मंदिर से अधिग्रहण वापस ले। अन्यथा ब्राह्मण समाज आंदोलन करने पर मजबूर होगा। इस अवसर पर ताड़केश्वर शर्मा, सुशील मंगाली, भीम सौपर्णा, डाॅ. अमित, राज कौशिक, ओमप्रकाश डूडीवाल, अरुण गौड़, श्याम अत्री, ललित मरहेटा, पुनीत पराशर आदि थे।