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जिले के स्कूलों में ज्वायफूल डे पर होगी कपड़े के थैले बनाने की प्रतियोगिता

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दैनिक जागरण के पॉलीथिन मुक्त भिवानी अभियान ने जोर पकड़ लिया है। बुधवार को हजारों छात्राएं इस अभियान का हिस्सा बन गई हैं। अब हर शनिवार को होने वाले ज्वायफूल डे में कपडे़ की थैलियां बनाने की प्रतिस्पर्धा जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में होगी, जो पॉलीथिन की थैलियों का विकल्प बनेगी और महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने में अहम योगदान देगी।

 

सामाजिक सरोकार की इस मुहिम को आगे बढ़ाने का कार्य किया है जिला उपायुक्त डॉ. अंशज ¨सह, ग्रीन सोसायटी के संरक्षक डॉ. पीके आनंद व उनकी टीम ने। जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश शर्मा भी इस मुहिम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पॉलीथिन मुक्त भिवानी अभियान को लेकर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बुधवार कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उपायुक्त अंशज ¨सह बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। इस अवसर पर छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुतियां दी, वहीं राष्ट्रीय स्तर की योग खिलाड़ी अनु व उसकी बहन ने योग का शानदार प्रदर्शन किया। स्कूल प्राचार्य किरण गिल, ग्रीन सोसायटी के अध्यक्ष यतिन्द्र नाथ, कर्ण मिर्ग, लेक्चरर रमेश मल्हान, राजीव शर्मा, राममेहर शर्मा सहित पूरा स्कूल स्टाफ मौजूद था।

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उपायुक्त अंशज ¨सह ने अपने संबोधन में कहा कि पॉलीथिन की थैलियों से हो रहे नुकसान से बचने के लिए प्रशासन ने दैनिक जागरण एवं ग्रीन सोसायटी के सहयोग से यह नया मिशन शुरू किया है। शहर हमारा है और इसे सुंदर व स्वच्छ बनाने की जिम्मेदारी भी हमारी है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि हमारी बेटियों से ही इसकी शुरूआत की जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि बेटियां अपने पापा को पॉलीथिन की थैलियां इस्तेमाल नहीं करने की अपील करेंगी तो पापा उन्हें कभी इंकार नहीं कर सकेंगे।

ग्रीन सोसायटी के संरक्षक डॉ. पीके आनंद ने कहा कि पॉलीथिन से होने वाले नुकसान से आप सभी पहले से अवगत हो। लेकिन जरूरत इस बात की है कि पॉलीथिन की थैलियों का विकल्प तलाशें। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल की सभी बेटियां अपनी माताओं से उनकी पुरानी साड़ियों के थैले बनाने के लिए कहें तो दोहरा फायदा होगा। बाजार से सामान खरीदने के लिए उनके पास मजबूत थैला उपलब्ध होगा, वहीं यदि जो गरीब परिवार हैं, वे इससे अपनी आजीविका भी चला सकते हैं। उन्होंने छात्राओं को शपथ दिलाई कि वे अपने दैनिक जीवन में पॉलीथिन की थैलियों का इस्तेमाल नहीं करेंगी और इसकी चर्चा अपने रिश्तेदारों व मित्रों से भी करेंगी।

ज्वायफूल डे पर कपड़े के थैले बनाने की होगी परीक्षा।

जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वे जिले के सभी स्कूलों में पत्र लिखेंगे कि शनिवार को होने वाले ज्वायफूल डे पर दूसरी गतिविधियों के साथ-साथ कपड़े के थैले बनाने की प्रतियोगिता भी शुरू करें। राजकीय कन्या स्कूल में शनिवार को सभी बेटियां कपड़े के थैले बनाकर लाएंगी और सबसे बेहतर थैला बनाने वाली बेटियों को सम्मानित किया जाएगा।