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शेड बनने से ही थमेगा नंदीगोशाला में मौत का सिलसिला

सुल्लर नंदीगोशाला में गोवंश पर ठंड का कहर जारी है। हालांकि पिछले दो दिनों से किसी गोवंश की मौत नहीं हुई है। सुल्लर और टंगैल नंदीगोशालाओं में पशुओं की मौत का आकड़ा 331 के पार पहुंच चुका है। टंगैल की जिस गोशाला में शुरुआत में मृतक पशुओं की संख्या न के बराबर थी अब उसने सुल्लर नंदीगोशाला में मारे गए पशुओं के आंकड़े को भी पार कर लिया है। ऐसे में जल्द ही शेड की व्यवस्था नहीं हो पाई तो ज्यादा दिनों तक दवा के सहारे बीमार गोवंश को बचाया नहीं जा सकेगा। वर्तमान में सुल्लर में 350 तो टंगैल में 300 गोवंश बचे हैं।

शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने दो दिन पूर्व सुल्लर नंदीगोशाला में पहुंचकर बीडीपीओ और पशु चिकित्सक को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही नया शेड बनाने के लिए 11 लाख रुपये देने की घोषणा भी की थी। अलबत्ता, अब मंत्री के 11 लाख रुपये आने के बाद ही नए शेड का निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। तब तक पशुओं की जान भगवान भरोसे ही रहेगी। वहीं नंदीगोशाला में मिट्टी भराव का कार्य अभी जोरों पर चल रहा है। गांव की पंचायत ने इसके लिए अपनी तीन एकड़ जमीन से मिट्टी उठवाकर गोशाला में डलवानी शुरू कर दी है।

सुल्लर में कार्रवाई से राहत पर टंगैल की स्थिति अभी भी दयनीय

जिला प्रशासन ने टंगैल और सुल्लर दो जगह गोशालाएं बनवाई हैं। सुल्लर की नंदीगोशाला शहर से सटी है जबकि टंगैल की गोशाला ग्रामीण एरिया में है। ऐसे में सुल्लर में तो जैसे-तैसे दानी सज्जन अपनी मदद पहुंचा रहे हैं लेकिन टंगैल में न तो दानी सज्जनों की संख्या बढ़ रही है न ही जिला प्रशासन इस ओर कोई ध्यान देना जरूरी समझ रहा है। यही कारण है कि यहां पर भी 177 से ज्यादा गोवंश की जान जा चुकी है। बता दें कि यहां बनाए गए शेड में महज 80 गोवंश के बैठने की ही व्यवस्था है जबकि 220 गोवंश बिना शेड के खुले आसमान तले रात और दिन बीताने को मजबूर हैं। वहीं सुल्लर में करीब 150 पशु खुले आसमान तले रातें बिता रहे हैं। नंदीगोशालाओं की बात करें तो नगर निगम के साथ-साथ नगर परिषद दोनों ने एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी है। इनके अधिकारियों ने अभी तक यहां झांककर भी देखना लाजमी नहीं समझा है। यदि जल्द शेड नहीं बनाए गए तो पशुओं की मौत को रोक पाना बस से बाहर हो जाएगा।