# बयान से पलटे करणी सेना प्रमुख ,पद्मावत देखने से इंकार         # अमेरिका में शटडाउन खत्म, राष्ट्रपति ट्रंप ने साइन किए बिल         # दिल्ली: राजपथ पर फुल ड्रेस रिहर्सल आज, कई जगह मिल सकता है जाम         # सेंसेक्स की डबल सेंचुरी, पहली बार 36000 के पार, निफ्टी ने भी रचा इतिहास         # सीलिंग के विरोध में दिल्ली के सभी बाजार आज रहेंगे बंद         # भारत-पाक बॉर्डर पर तनाव के बीच जम्मू कश्मीर में LOC के आर - पार बस सेवा फिर शुरू         # मिजोरम में शरण लिए म्यांमार के 1400 लोगों का देश लौटने से इनकार         # हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों को देना होगा दहेज नहीं लेने का शपथ पत्र         # हरियाणा के कांग्रेस विधायकों को पार्टी फंड के लिए नोटिस         # दिल्ली एनसीआर में मौसम ने ली करवट, हल्की बारिश से ठंड की वापसी        
News Description
स्वाभिमान की शून्यता को निकालना होगा : राजेश गोयल

रोहतक :मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार के निजी सचिव राजेश गोयल ने कहा कि भारत का इतिहास स्वयं में अपनी एक पहचान आज पूरे भू-मंडल में रखता हैं। उन्होंने कहा कि आज हम स्वयं को विदेशी पहचान से दूर नहीं कर पा रहे हैं। हम स्वीकार करना भूल चुके हैं कि दुनिया को ज्ञान भारत ने दिया है। हम स्वाभिमान शून्यता से ओत-प्रोत हैं। हम गरीब नहीं थे। 

वि‌र्श्व गुरु और सोने की चिड़िया भारत को हमने दीन-हीन समझने की भूल की है। भाषा के रूप में संस्कृत वि‌र्श्व को देकर पूरे विश्व का प्रकाट्य रूप भारत ने दिया। आज पूरे वि‌र्श्व के भाषाविद् इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि प्रत्येक भाषा की जननी संस्कृत है। वे मंगलवार को बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में आयोजित द्वितीय महंत चांदनाथ योगी स्मृति व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इस व्याख्यान का विषय था-''भारत गौरवशाली था, है और रहेगा''।

उन्होंने कहा कि महर्षि पाणिनी रचित व्याकरण में कोई बदलाव नहीं आया, परन्तु दूसरी भाषाओं में शब्द उपयोग कम और उसके अर्थ अलग-अलग हैं। पूरी दुनिया को पढ़ना-लिखना हमारे ऋषि-मुनियों ने सिखाया। वेदों के रूप भारत का अथाह ज्ञान पूरे विश्व को भारत ने किया। विज्ञान के क्षेत्र में दिशा-निर्देश देने का कार्य भारत से आया। शून्य और दशमवल के आविष्कारक बनकर हमने वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

विश्वविद्यालय कुलपति डा. मारकण्डे ने कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के उदाहरण हमारे ग्रन्थों में लिखित हैं। उन्होंने कहा कि पुष्पक विमान जैसी वैभवशाली सभ्यता जो संकुचन और विस्तारण को भी समेटे थी, तक आज भी हमारा विज्ञान नहीं पहुंच पाया।