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आयुध डिपो क्षेत्र के प्रतिबंधित क्षेत्र पर संशय बरकरार

आयुध डिपो क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण जिला प्रशासन और नगर निगम के लिए गले की फांस बन गए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में इस मामले में फरवरी में सुनवाई होगी। इससे पहले 15 दिन में आयुध डिपो के 300 मीटर दायरे की सर्वे रिपोर्ट नगर निगम द्वारा जिला उपायुक्त को सौंपी जाएगी। करीब दो साल से इस क्षेत्र में सर्वे की प्ला¨नग चल रही है। हालांकि नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि उनके द्वारा इस क्षेत्र में मकानों का सर्वे पूरा कर लिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक 300 मीटर दायरे में करीब 6 हजार मकान हैं। लेकिन अब मकानों की संख्या के साथ-साथ फोटोग्राफी की डिटेल भी मांगी गई है, जो नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है। 2016 में भी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम के उपायुक्त को 300 मीटर दायरे में अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन इस पर जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

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क्या है मामला

एयरफोर्स के आयुध डिपो का दायरा 900 मीटर से घटाकर 300 मीटर करने के बाद इस दायरे में बने मकानों को तोड़कर अतिक्रमण को हटाया जाना है। आयुध डिपो के चारों तरफ अवैध रूप से हजारों मकान बन गए हैं। डिपो में रखे बारूद-गोले के भंडार में आग लगने या अन्य कोई हादसा होने से जान माल का भारी नुकसान हो सकता है। इस क्षेत्र में निर्माण करने, बिजली-पानी के कनेक्शन देने पर पाबंदी है। लेकिन इसके बावजूद निर्माण कर कनेक्शन भी दिए जा रहे हैं। मिलीभगत कर प्लाटों और मकानों की रजिस्ट्री भी की जा रही है।