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बस्ते का बोझ कम करें, बचपन बचा रहे, इसके लिए रास्ता ढूंढें

शिक्षाबोर्ड स्थित शिक्षक भवन में बच्चों के बढ़ते बस्ते के बोझ को कम करने के उद्देश्य से एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यअतिथि शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह रहे। 

इस दौरान कई स्कूलों के प्राचार्य, मनोवैज्ञानिक, शिक्षक, अभिभावक बच्चों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम में चिंतन किया गया कि किस प्रकार से बच्चों के बढ़ते बस्ते के बोझ को कम किया जाए। चेयरमैन ने इस विषय को लेकर चर्चा की गई तथा चर्चा में सभी ने अपनी राय रखी। बोर्ड चेयरमैन जगबीर सिंह ने कहा कि आज बच्चे भारी भरकम बोझ तले दबते जा रहे हैं। जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि कई माता पिता अपने बच्चें पर खुद की अभिलाषाओं को थोंप देते हैं। इससे बच्चें का बचपन खत्म हो रहा है। बच्चा दिन रात अपने माता पिता के समाने साकार करने की कोशिश में जुटा रहता है लेकिन पूरा नहीं कर पाता। क्योंकि उसकी स्वयं की अभिलाषा कुछ ओर होती है। 

उन्होंने बताया कि बच्चों को सही रास्ता दिखाना माता पिता का कर्तव्य है लेकिन अपनी बात थोपना गलत है। उन्होंने नैतिक शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों में नैतिक शिक्षा के गुर भरने चाहिए तथा इसके लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भी प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि अभिभावकों को बताया कि बच्चा अपने रास्ते से ना भटकें इसके लिए उसे शिक्षा के साथ साथ धार्मिक जानकारी भी देनी चहिए। बच्चों को गीता के श्लोकों वेदों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। उन्हें बताया कि स्वामी विवेकानंद, शहीदे आजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव सरीखे व्यक्तित्व के बारे में जानकारी देनी चहिए ताकि वे उनके दिखाए गए मार्ग पर चल कर अपना जीवन सफल कर सके। उन्होंने निजी स्कूल संचालकों प्राचार्यों से अपील की कि वे बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने के तरीके ढूढे ताकि बच्चे का बचपन खोए नहीं बल्कि बचपन को वह पूर्ण रुप से आंनद से जी भी सकें। और अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें। इस अवसर पर मीनाक्षी कौशिक, जगदीप कौर, डॉ. अनीता अंचल, अनीता शर्मा, डॉ. उत्पल, प्रवक्ता राजकुमार वर्मा, प्रवक्ता दीपमाला सोंलकी, शगुन, मोनिका, रचना रानी, प्रवक्ता शिखा कुमारी, एडवोकेट मुकेश रहेजा, देवेन्द्र परमार, रीतिक वधवा, पूनम शर्मा, हेंमत तंवर, अध्यापिका राशि आदि मौजूद थे।