News Description
गीता जयंती संध्या में देशभक्ति गीतों का तड़का

पानीपत : भारतीय सभ्यता-संस्कृति विश्व में सबसे प्राचीन है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी हमारी संस्कृति कसौटी पर खरी उतरी है। लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व वेदों की रचना हुई, इनका सार गीता में समाहित है। भारत ने ही विश्व को हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख धर्म दिए। आयोजन से विश्व के कोने-कोने में गीता का संदेश पहुंचेगा। जिला परिषद की चेयरपर्सन आशू शेरा ने आर्य पीजी कॉलेज के सभागार में गीता जयंती महोत्सव की सास्कृतिक संध्या में बोलते हुए यह बातें कही।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल की व्यापक सोच के कारण गत तीन वर्षो से हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों व विकास खण्डों में भी गीता जयंती मनाई जाने लगी है। इसके उपरांत उत्तराखंड, असम व पश्चिमी बंगाल के कलाकारों ने अपने-अपने राज्य के लोकगीतों व नृत्यों से सभ्यता-संस्कृति की छटा बिखेरी। ऐसा लगा कि पूरा भारत एक सभागार में समाया हुआ है। इससे पूर्व अतिरिक्त उपायुक्त राजीव मेहता ने सभी आगंतुकों का स्वागत व आभार प्रकट किया। भष्मासुर वध की प्रस्तुति पर सभागार मां दुर्गा के जयकारों से गूंज उठा। जिओ गीता व श्री कृष्ण सेवा समिति ने कलाकारों को नकद इनाम दिया।

सांस्कृतिक संध्या का आयोजन उत्तर क्षेत्र सास्कृतिक केन्द्र पटियाला, हरियाणा, सूचना व जनसम्पर्क विभाग चण्डीगढ़ और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर एसडीएम गौरव कुमार, सुरेश अरोड़ा, सूरज दुरेजा, कृष्ण नारग, अनिल शर्मा, डॉ. रमेश सरोहा आदि मौजूद रहे।