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मंदिर-मस्जिद मामले में फैसला जो भी हो, सम्मान करेंगे प्रिंस याकुब

 पंचकूला : अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद का विवाद सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। दिसंबर के पहले सप्ताह से मामले की सुनवाई शुरू होनी है। इसमें प्रमुख पक्ष के तौर पर देश के अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफर के वंशज और उत्तराधिकारी होने का दावा करने वाले प्रिंस याकुब हबीबुद्दीन टूसी इन दिनों चर्चित हैं। हिमाचल प्रदेश के दो रॉयल परिवारों के आमंत्रण पर मंगलवार को वे पंचकूला के रामगढ़ फोर्ट पहुचे। मुद्दा चूंकि न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए उन्होंने सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन इतना बताया कि फैसले के बाद सद्भाव कायम होगा। हिमाचल प्रदेश की सीबा रियासत के राजपरिवार प्रमुख अशोक ठाकुर, कुटलेहडड़ रियायत राज परिवार के प्रमुख बुद्धिश्वर पाल और बिलासपुर राजपरिवार के शुभेंद्र नारायण चंद के साथ इस मुद्दे पर करीब दो घटे तक बातचीत चली।

टूसी ने बताया कि जो उनके बहादुरशाह जफर के असली वारिस होने पर संदेह करते हैं, उन्हें न्यायालय में जाना चाहिए। उन्हें डीएनए टेस्ट के बाद बाकायदा न्यायालय ने ही जफर के वंशज होने संबंधी प्रमाणित किया है। यह पूछने पर कि क्या अयोध्या में राम मंदिर बनने में अब कोई बाधा नहीं है। वे बोले, सर्वोच्च न्यायालय का फैसला दोनों पक्षों को मंजूर होगा। वैसे आपसी सहमति से ही मामले का समाधान निकलेगा। इसके लिए उन्होंने प्रयास कर लिया है। अब श्रीश्री रविशकर मध्यस्थता का प्रयास कर रहे हैं

द्मावती पर जारी विवाद पर टूसी ने किसी तरह की टिप्पणी नहीं की, जबकि राज परिवार प्रमुखों ने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ सहन नहीं की जा सकती। उन पर किसी पार्टी विशेष के हिमायती होने के आरोप झूठे हैं। न उन्हें राज्यसभा सदस्य बनना है और न ही कोई चुनाव लड़ना है। वह देश में सद्भावना बनाने के पक्षधर हैं और यह कैसे होगा, जल्द ही स्पष्ट हो जाएगा।