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मनुष्य के चारों ओर उगे विघ्न बाधाओं के कांटे : पवन

हंसने या रोने से संसार का चक्र रूकने वाला नहीं हैं। जिस प्रकार जन्म के साथ मृत्यु बंधी है, उसी प्रकार सुख के साथ दुख, हार के साथ जीत और निराशा के साथ आशा सुनिश्चित है। हंस-हंस कर रहो, चाहे रो-रोकर यदि संसार में रहना है तो सब कुछ सहना सीखो। जो अतिशय सहन करे, वही तो संत है और यही जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला है। यह बात पवन आचार्य ने मां वैष्णवी के विशाल सत्संग व मासिक भंडारे के अवसर पर अपने प्रवचनों में कही।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के चारों ओर विघ्न-बाधाओं के कांटे उगे हुए हैं, दुखों की धूप में उसे तपना पड़ता है, निराशा एवं पराजय की अशांति में उसे झुलसना पड़ता है। इस मौके पर रोशन लाल, विजया अग्रवाल, बेबी ग्रोवर, पुष्पा छाबड़ा, वीना मदान, राज बतरा, सीमा परूथी, लीलावंती चोपड़ा, नीरज मिगलानी एडवोकेट, श्याम लाल छाबड़ा, सुरेंद्र ¨सगला, हरीश गिरधर मौजूद रहे