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यूनिटेक के खिलाफ बिना फ्लैट दिए करोड़ों वसूलने के आरोप

रेवाड़ी: यूनिटेक बिल्डर्स की मुश्किलें रेवाड़ी में भी बढ़ सकती हैं। यहां के सेक्टर 15 में आवासीय कॉलोनी विकसित करने वाले इस बिल्डर पर निर्धारित समय में फ्लैट दिए बिना ही करोड़ों रुपये वसूलने सहित कई आरोप हैं। भाजपा व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सतीश खोला की शिकायत पर हरियाणा सरकार ने मामले की जांच चंडीगढ़ सचिवालय में अंडर सेक्रेटरी मो¨हद्र दत्त को सौंपी है।

शिकायतकर्ता के अनुसार 10 दिसंबर 2009 को सेक्टर 15 की 83.037 एकड़ पर सरकार द्वारा लाइसेंस नंबर 84/2009 जारी किया गया था। जिस जमीन पर बिल्डर ने आवासीय परिसर विकसित करने का लाइसेंस लिया था, वह जमीन तीन लोगों की है। इस जमीन के आधार पर यूनिटेक लिमिटेड गुरुग्राम को रिहायशी कॉलोनी विकसित करने के लिए लाईसेंस जारी हुआ था। इस लाइसेंस की वैधता 9 दिसंबर 2013 तक थी।

आरोप है कि बिल्डर ने उपरोक्त लाइसेंस के तहत सैकड़ों मकान कागजों मे बेच दिए, लेकिन अब जमीन मालिकों व बिल्डर की आपसी अनबन के कारण लाइसेंस धारकों ने लाइसेंस रिन्यूवल के लिए सरकार को आवेदन ही नही किया। इसके चलते अब संबंधित विभाग ने लाइसेंस रद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी सुनवाई अब 30 नवंबर 2017 को होगी। एग्रीमेंट के अनुसार निवेशकों को दिसंबर 2014 में ही मकान मिल जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खोला ने चार निवेशकों अजय कुमार यादव, अनिल कुमार , सुरेन्द्र सौरवा व सुरेन्द्र रोहिल्ला रेवाड़ी की शिकायत का उल्लेख करते हुए यह दावा भी किया है कि पुलिस इस मामले में एफआइआर ही दर्ज नहीं कर रही है। एफआइआर दर्ज नहीं करने का कारण यह बताया गया है कि एक लाइसेंस धारक केंद्रीय मंत्री है।

खोला ने यह राज भी खोला है कि जिस जमीन पर लाइसेंस लिया गया, उसका टाइटल सही नहीं था। एक लाइसेंस धारक ने खुद 9 नवंबर 2017 को सहायक कलेक्टर के न्यायालय में लाइसेंस वाली 12 एकड़ 6 कनाल 9 मरला जमीन मृतक किरायेदारों से खाली कराने के लिए मुकदमा दर्ज किया है। यह सवाल उठाया गया है कि अगर जमीन का टाइटल साफ नही था तो सरकार द्वारा लाइसेंस कैसे जारी किया गया। किसी बड़ी गड़बड़ी की आशंका भी जताई गई है। देखना यह है कि खोला की शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच का क्या निष्कर्ष निकलता है। यह भी संभव है यह शिकायत राजनीति से प्रेरित हो और एक केंद्रीय मंत्री की छवि को दागदार बनाने का प्रयास हो। जांच के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा