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संविधान की प्रस्तावना को अपने जीवन में आत्मसात करें-शक्ति सिंह

अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह ने संविधान दिवस के अवसर पर अधिकारियों व कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे संविधान की प्रस्तावना को अपने जीवन में आत्मसात करें। इस प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा गया है तथा संविधान का सार भी इसमें निहित है। आजादी के बाद संविधान ने ही हमें अधिकार प्रदान किए हैं तथा संविधान सभी को न्याय की गारंटी देता है। संविधान दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य आम जन को संविधान के महत्व तथा उनके अधिकारों से अवगत करवाना है। 

अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह संविधान दिवस के अवसर पर लघु सचिवालय स्थित सभागार में विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों को संविधान की प्रस्तावना तथा संविधान के महत्व का वर्णन कर रहे थे। उन्होंने संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा। प्रस्तावना के अनुसार हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए तथा उन सबमें,व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित कराने वाली, बंधुता बढ़ाने के लिए, दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधानसभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ईस्वी (मिति माघशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं। संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित किया गया। 

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश का शासन चलाने के लिए संविधान की रचना हेतू डा. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में जुलाई 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया। इस सभा द्वारा 2 वर्ष 11 महीनें एवं 18 दिन में 166 बैठकें आयोजित करके संविधान निर्माण की प्रक्रिया पूर्ण करते हुए 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा पारित किया गया तथा 26 जनवरी 1950 को संविधान को लागू कर दिया गया। संविधान की प्रस्तावना को संविधान की आत्मा कहा जाता है। संविधान की प्रारूप समिति का गठन डा. भीम राव अंबेडकर की अध्यक्षता में किया गया था। संविधान निर्माण के  स्त्रोतों में 1935 के भारत शासन अधिनियम के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड, आस्ट्रेलिया, जमर्नी, कनाड़ा, दक्षिण अफ्रीका तथा जापान के संविधान शामिल हैं। संविधान में भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है, जिसके अनुसार राज्य का प्रधान अथवा राष्ट्रपति जनता द्वारा निर्वाचित व्यक्ति होगा। राष्ट्रपति का चुनाव परोक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है। जनता के निर्वाचित जन प्रतिनिधि राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेते हैं। इस मौके पर नगराधीश श्री सुशील कुमार, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी दीपक खुराना सहित अन्य विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।