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मधुमक्खी पालन को व्यवसाय बना रहे किसान

हथीन : जिले में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय खूब फल फूल रहा है। इससे लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहें हैं। इस व्यवसाय से जुड़कर जिले के गांव हुडीथल निवासी सोनू राजपूत ने न केवल स्वयं को सफल बनाया, अपितु कई बेरोजगारों को भी रोजगार दिया। व्यवसाय से सोनू काफी खुशहाल ¨जदगी गुजर बसर कर रहा है।

मधुमक्खियों के पालन के लिए इस व्यवसाय को खेती के साथ-साथ आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि इस व्यवसाय में मधुमक्खी के बाक्स को सरसों इत्यादि फसल के खेतों के समीप रख दिया जाता है। मधुमक्खी अपने घरौंदे से कई किलोमीटर दूर से फसलों से शहद चूस कर वापस आ जाती हैं। सरसों की फसलों से अच्छा खासा शहद मुधमक्खियों द्वारा निकाला जा सकता है। पलवल व मेवात जिलों में मार्च माह तक सरसों की फसल पर फूल होता है। इसी तरह धनिया, जीरा व सौंफ इत्यादि फसलों से मधुमक्खियां शहद निकालने में सबसे अधिक रुचि लेतीं हैं।

साथ ही शहद के अच्छे भाव मिले इसके लिए इस व्यवसाय से बड़े स्तर पर जुड़े व्यवसायियों से संपर्क किया जाता है। मेवात के शहद को कई नामी कंपनियां खरीद कर बाजार में बेच रही हैं। व्यवसाय को अपनाने पर सरकार भी अनुदान करती है साथ ही बेरोजगार युवाओं को बैंक से ऋण भी आसान किस्तों पर मुहैया कराया जा रहा है। कम समय के प्रशिक्षण के बाद ही इस व्यवसाय को शुरू किया जा सकता है।

किसान सोनू का कहना है कि मधुमक्खी के बाक्स राजस्थान से खरीदे थे, जबकि इस व्यवसाय को करने वाले युवा सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, देहरादून व पंजाब के लुधियाना से मधुमक्खी पालन के लिए बाक्स व मधुमक्खी खरीद सकते हैं। सरसों की फसल से मधुमक्खियां सबसे ज्यादा शहद एकत्र कर लेती हैं। प्रत्येक सप्ताह में दो से तीन बार शहद निकाला जाता है। प्रत्येक बाक्स से अमूमन तीन लीटर तक शहद निकाला जा सकता है। फसलों के फूल पर शहद कम ज्यादा निकलना निर्भर करता है। वैसे व्यापारी नब्बे से लेकर 120 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेचा जा रहा है।