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दशकों से यूपी व हरियाणा के किसानों में विवाद का कारण बन रही जमीन

पलवल:दशकों से यूपी व हरियाणा के किसानों में विवाद का कारण बनती रही जमीन की पैमाईश अधिकारियों की उदासीनता के चलते उलझी रह सकती है। हरियाणा व यूपी की सरकारों नें संयुक्त रुप से विवादित जमीन की पैमाईश का करार भारत सरकार की संस्था सर्वे आफ इंडिया को सौंपा था। लेकिन सर्वे टीम का कहना है कि सरकारी अधिकारी उन्हें इस कार्य में सहयोग नहीं कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को टीम ने पलवल जिले के गांव शेखपुर व यूपी के गौतम बुद्ध नगर के गांव झुप्पा में पैमाईश के बाद जो निशान लगाए थे, जिन्हें कि ग्रामीणों ने हटा दिया। मामले को लेकर पैमाईश कर रही टीम के अधिकारियों ने पलवल के एसडीएम एसके चहल से भी मुलाकात की।

यमुना किनारे बसे गांवों की जमीन को लेकर किसानों में विवाद को लेकर कई बार खूनी संघर्ष भी होता रहा है। जिसका कारण यह रहता है कि यहां के किसानों की जमीन की कोई निशानदेही नहीं है। यमुना जल का जिस तरफ कटाव होता है, उसी के आधार पर किसानों की फसल का फैसला होता है। जब विवाद अधिक हुए तो मामले अदालतों में जाने शुरू हुए व फसलों की कटाई पुलिस की देखरेख में होनी शुरू हो गई। विवादों को खूनी संघर्ष में बदलते देख दोनों प्रदेशों की सरकारों ने इस विवाद को समाधान के लिए सर्वे आफ इंडिया से जमीन की पैमाईश कराने का करार कर लिया। इसके लिए हरियाणा की कांग्रेस सरकार तथा यूपी की अखिलेश सरकार ने 36-36 लाख रुपये का निर्धारित शुल्क भी जमा करा दिया।