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तीन साल पंचायत, थाने, कोर्ट कचहरी नारी निकेतन से होकर गुजरी ये प्रेम कहानी

पिछलेतीनसालों में थाने, कोर्ट-कचहरी, पंचायत, नारी निकेतन से होकर गुजरी अमित और 19 वर्षीय युवती की प्रेम कहानी मंगलवार को परवान चढ़ गई। दोनों ने जब अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लिए तब उनका सवा माह का बेटा दादी की गोद में था। 

इस शादी में लड़की के परिजन शामिल नहीं हुए। सोमवार को ही एसडीएम कोर्ट ने अमित की अर्जी पर सुनवाई करते हुए युवती के बयान लिए थे। युवती ने कहा था कि वह अमित के साथ ही रहना चाहती है। दोनों एक ही गांव से हैं। अमित के खेत युवती के घर के पास थे, तीन साल पहले दोनों में संबंध बने। लड़की के परिजनों ने अमित पर दो बार दुराचार का केस दर्ज कराया। पहले समझौता हो गया, दूसरे पर सितंबर में हाईकोर्ट में सुनवाई है, जिसमें लड़की के बयान होंगे। 

हमने गुनाह किया हो बच्चे का तो कसूर नहीं था 

10मई को जब मैंने अमित के बच्चे को जन्म दिया तो मेरे घरवालों ने शर्त रख दी कि वे बच्चे को नहीं अपनाएंगे। उनकी जिद थी कि पहले पुलिस अमित को गिरफ्तार करे। मैंने साफ कह दिया था कि मैं किसी कीमत पर बच्चे को नहीं छोड़ूंगी। मुझे अमित पर भरोसा था। मैं छह दिन तक अस्पताल के लेबर रूम में पड़ी रही। दिन-रात रोती रहती थी। फिर काउंसलिंग के बाद मुझे करनाल के वन स्टॉप सेंटर और बाद में नारी निकेतन भेज दिया गया। मेरे मन में एक ही बात आती थी कि अमित से प्यार कर मैंने गुनाह किया होगा, लेकिन बच्चे का तो कोई कसूर नहीं। अमित और मैं शुरू से ही शादी करना चाहते थे। 

घर छूटा और काम भी, प्यार मिला इसे जीत मानता हूं 

जबसे मेरे खिलाफ दुराचार के आरोप लगे तभी से घर और काम छूट गया था। पुलिस लगातार गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। कचहरी के चक्कर लगाता रहा। दिन भर खाना तक नसीब नहीं होता था। जब मुझे पता चला कि मैं बाप बन गया हूं तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैं अस्पताल में देखने भी गया। वहीं से महिला थाने में बयान दर्ज कराने गया तो मेरी प्रेमिका लिपट कर रोने लगी। मैं नारी निकेतन में भी उससे मिलने गया। मैं पहले दिन से ही शादी के लिए तैयार था लेकिन कुछ लोग बाधा बनते रहे। मुझे अपनी साथी पर पूरा भरोसा था इसलिए उससे बात किए बगैर ही मैंने एसडीएम कोर्ट मेें अर्जी लगा दी थी कि उसे मेरे साथ जाने की अनुमति मिले। मेरा भरोसा कायम रहा। 

शादी के बंधन में बंधा जोड़ा।