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तेज गति और हल्की सी लापरवाही पड़ती है जीवन पर भारी

जिला में करीब 1400 किलोमीटर की सड़कें हैं। इनमें तीन नेशनल हाइवे भी शामिल हैं। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़कों की हालत अच्छी होने के कारण वाहन भी सरपट दौड़ते नजर आते हैं। सड़कों पर तेज गति से दौड़ने वाले वाहनों की वजह से सड़क दुर्घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। देखा जाए तो कोहरा, लापरवाही, खतरनाक मोड़ व ओवर लोडेड वाहन के कारण हो रहे सड़क हादसों में हर साल सैकड़ों लोग अकाल मौत के आगोश में समा जाते हैं। इस बार नवंबर की शुरूआत में घना कोहरा शुरू हो गया था। जिसके परिणाम स्वरूप जिला में कई सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें कई लोग घायल हुए हैं वहीं दो लोग जान से भी हाथ धो चुके हैं। साल 2017 के सड़क हादसों को देखा जाए तो अब तक 459 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में 225 लोगों की मौत व 343 लोग घायल हुए हैं। जबकि पिछले चार साल के आंकड़ों को देखा जाए तो इस दौरान हुई 1921 सड़क दुर्घटनाओं में 1058 लोगों की मौत हुई है और 1490 लोग 31 अक्टूबर तक घायल हुए हैं। इन घटनाओं का सबसे बड़ा कारण सड़कों पर स्थित अंधे मोड, ओवर लोडेड वाहन व कोहरा मुख्य कारण बनता रहा है। जिले की कोई ऐसी सड़क नहीं है जहां पर कोई दुर्घटना संभावित स्थान न हो। जिले के मुख्य मार्गो पर करीब 50 ऐसे मोड हैं जहां पर अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। चाहे वह नेशलन हाईवे हो या फिर कोई अन्य रोड हो। अधिकांश सड़कों पर दुर्घटना संभावित स्थान हैं। अनेक स्थानों पर डिवाइडर, रिफ्लेक्टर, ट्रैफिक सिग्नल, जरूरी दिशानिर्देश सूचना पट इत्यादि नहीं हैं। नेशनल हाईवे 71 ए पर अनेक स्थानों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर सांकेतिक बोर्ड तक नहीं हैं। राजमार्गों के किनारे तमाम जगहों पर आबादी वाले इलाके हैं, यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

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ट्रैफिक सिग्नलों का नहीं हो रहा पालन

शहर में तीन चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं। इन लाइटों को बदलने के लिए दो से तीन बार लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अधिकांश समय ये बंद पड़े रहते हैं। जब इन्हें चलाया जाता है तो वाहन चालक इनकी परवाह नहीं करते। लाल लाइट आने के बाद भी वे बिना रूके ही आगे बढ़ जाते हैं। इनके आसपास यातायात पुलिस के जवान भी नहीं होते हैं और यातायात के नियमों के प्रति वाहन चालक भी जागरूक नहीं हैं। सबसे बड़ी आवश्यकता तो वाहन चालकों के जागरूक होने की है। अगर पुलिस के जवान इन चौक चौराहों पर खड़े हों तो वाहन चालक रेड लाइट के नियमों का भी पालन करेंगे।

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सड़कों के साथ खड़े रहने वाले वाहन भी बनते हैं दुर्घटना का कारण

सड़कों के किनारे खड़े रहने वाले वाहन, खराब वाहन व दुर्घटनाग्रस्त वाहन कोहरे व रात के समय दुर्घटनाओं का कारण बन जाते हैं। पिछले दिनों कोसली मार्ग पर भी एक दुर्घटनाग्रस्त ट्रक से टक्कर होने के कारण एक युवक की मौत हो गई थी। इसी प्रकार मुख्य मार्गों पर होटल व ढाबों के आगे भी भारी वाहन रात व कोहरे के समय खड़े रहते हैं।

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नेशनल हाईवे से सफेद पट्टी गायब

नेशनल हाईवे 334 बी पर झज्जर सांपला के बीच कई स्थानों पर सफेद पट्टी तक नहीं हैं। सड़कों पर काफी स्थानों से कोहरे के समय वाहन चालकों के लिए सहायता बनने वाली सफेद पट्टी तक गायब हैं, तो कहीं सड़कें उबड़-खाबड़ हैं। वहीं जिले में कोई ऐसा गांव नहीं है जहां पर ब्रेकर न बने हों, लेकिन रात के अंधेरे व कोहरे के दौरान ये ब्रेकर वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते। प्राय: गांव के इन ब्रेकरों पर सफेद पट्टी तक नहीं लगी है। ब्रेकर दिखाई नहीं देने के कारण वाहन चालक हादसों का शिकार हो जाते हैं और जान से हाथ धो बैठते हैं। शहर के चारों तरफ बनाए गए बाइपास पर भी कई स्थानों पर सफेद पट्टी नहीं हैं। रोहतक रोड से सांपला रोड, सांपला रोड से बहादुगढ़ रोड को जोड़ने वाले बाईपास की हालत काफी दयनीय हो चुकी है। इन सड़कों से अक्सर भारी वाहनों का आवागमन लगा रहता है।

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जिला में दुर्घटना संभावित स्थानों पर संकेतक बोर्ड व रात को कोहरे के दौरान लाइट पड़ने पर चमकने वाले रिफ्लेक्टर भी लगवाए जा रहे हैं। वाहन चालकों व आम जन को भी जागरूक किया जा रहा है। ताकि इस दौरान होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सके