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करीब 10 सालों से एक ही रूम में चल रहे हैं 4-4 सेक्शन और कक्षाएं, अब डबल शिफ्ट की तैयारी

शहर के स्लम एरिया अशोक नगर के राजकीय उच्च विद्यालय में जगह का अभाव है। यहां विद्यार्थियों की तादाद के हिसाब से 17 कमरे होने चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में केवल 9 ही हैं। ऐसे में चार-चार सेक्शन एक ही कमरे में चल रहे हैं। कमरों की कमी के चलते बरामदे में ही कक्षाएं लगानी पड़ रही है। स्कूल के लिए जगह मिल पाने के कारण अब स्कूल प्रशासन प्राइमरी मिडिल के विद्यार्थियों की अलग-अलग शिफ्ट में कक्षाएं चलाने की तैयारी कर रहा है। जहां एक ओर सरकार विकास की बात कर रही है, ऐसे में 8 शहरी इलाके में सरकारी स्कूल को डबल शिफ्ट में चलाना पड़ेगा। 

स्कूल निर्माण समिति के अध्यक्ष दलीप बेधड़क के प्रयासों से अशोक नगर में 1983 में पूर्व मंत्री स्व. लीलाकृष्ण ने अपनी मलकीयत में से करीब 20 मरले बच्चों के लिए स्कूल बनाने के लिए दान की थी। तभी से इस स्कूल में प्राइमरी विंग चल रही है। बताया जाता है कि वर्ष 2006-07 में शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए इसे अपग्रेड कर मिडिल स्कूल का दर्जा दे दिया। वर्तमान में अशोक नगर आसपास के स्लम क्षेत्र से यहां प्राइमरी विंग के 403 मिडिल विंग के 114 बच्चे पढ़ने आते हैं। 

प्राइमरी की तरह मिडिल स्कूल की भी हालत खस्ता है। छठी, सातवीं आठवीं के 114 बच्चों के लिए दो ही कमरे हैं। छठी को छोड़कर मजबूरी में सेक्शन नहीं बनाए गए। 

अकेले प्राइमरी विंग को चाहिए 17 कमरे 

प्राइमरीविंग के 6 कमरे ऊपर 3 कमरे ग्राउंड फ्लोर पर बने हुए है। मजबूरी में एक कमरे में कक्षा के 4-4 सेक्शन चल रहे हंै। पहली कक्षा के दो सेक्शन, दूसरी के तीन, तीसरी चौथी के चार-चार जबकि 5वीं के तीन सेक्शन एक साथ एक ही कमरे बरामदे में चल रहे हैं। हालांकि प्राइमरी स्कूल के लिए 17 कमरों की जरूरत है। 

2014 मेंबिल्डिंग हुई थी कंडम घोषित 

शिक्षा विभाग ने वर्ष 2014 में स्कूल के 6 में से 3 कमरों को कंडम घोषित कर उन्हें तोड़ दिया। लेकिन ग्रांट आने मिलने के चक्कर में करीब एक-डेढ़ साल तक कमरों का निर्माण नहीं हुआ। मजबूरी में महज तीन कमरों में ही पहली से आठवीं तक की कक्षाएं लगती रही। मजबूरी में स्टाफ को बरामदों में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ा। 

झुग्गी वाले बच्चों के लिए पहली शिफ्ट हो 

दो शिफ्टों के लिए विभागीय प्रक्रिया शुरू 

प्राइमरी विंग की हैड टीचर निर्मला देवी ने बताया कि प्राइमरी के अधिकांश बच्चे पास की झुग्गियों से आते है। सुबह-सवेरे उनके माता-पिता उन्हें स्कूल छोड़ने के बाद काम पर चले जाते है। उन्होंने विभाग से अपील की है कि मॉर्निंग शिफ्ट में प्राइमरी की कक्षाएं लगे। 

डीईईओ संगीता बिश्नोई ने बताया कि अशोक नगर के राजकीय उच्च विद्यालय को दो शिफ्टों में चलाने के लिए विभागीय प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल में जगह का काफी अभाव है। इस स्कूल को प्राइमरी मिडल विंग की कक्षाएं सुबह दोपहर को शुरु करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए डीईईओ कार्यालय ने स्कूल प्रबंधन एसएमसी से प्रस्ताव मांगा है। 

ये रहेगा समय 

मॉर्निंगशिफ्ट की कक्षाएं सुबह साढ़े 8 से दोपहर साढ़े 12 बजे तक लगेगी। जबकि इवनिंग शिफ्ट में दोपहर एक से शाम साढ़े 5 बजे तक कक्षाएं लगेगी। 

कमरे टूटने के चलते स्कूल प्रशासन ने 2016 में विभाग से आग्रह कर मिडिल विंग के करीब 180 बच्चों को हुडा सेक्टर स्थित प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट करवा दिया। 180 बच्चों में से 70 फीसदी छात्राएं थी। परिजनों ने दूर होने सड़क पार कर स्कूल जाने के कारण बच्चों को भेजने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। लगातार छात्र संख्या घटती रही और मिडल विंग बंद होने के डर से स्कूल प्रशासन ने जुलाई 2017 को वापस अशोक नगर की पुरानी बिल्डिंग में शिफ्ट करवा लिया।