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दस साल से हर रोज लोगों के खून से लाल हो रही सड़कें

घर से निकलिए तो अपनों की दुआएं लेकर, क्योंकि हरियाणा में तमाम सुरक्षा बंदोबस्त के बावजूद सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं। पिछले दस सालों में न तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी हुई और न ही जान गंवा देने वालों की संख्या में कमी आई है। प्रदेश में हर साल औसतन करीब पांच हजार आदमी अपनी जान से हाथ धो रहे हैं।

यह औसत प्रतिदिन 13 जिंदगियों के खत्म होने का हैप्रदेश में सड़क हादसे उस स्थिति में भी बढ़ रहे, जब हरियाणा से होकर गुजरने वाले नेशनल व स्टेट हाईवे पर खास गतिरोध नहीं है। चंडीगढ़ से दिल्ली के बीच अधिकतर निर्माण कार्य पूरे हो चुके है। इसके बावजूद राज्य की सड़कें खून से हर साल लाल हो रही हैं।

हरियाणा की यातायात पुलिस ने सरकार को जो रिपोर्ट दी है, उसके मुताबिक धुंध में भी वाहनों के पहिए चलते रहना, तेज रफ्तारी और शराब पीकर वाहन चलाना दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। पिछले कई सालों से लगातार ओवरलोड वाहन सड़कों पर चल रहे हैं। बिना रिफ्लेक्टर के चलने वाली गन्ने की ट्रालियों पर किसी का अंकुश नहीं है। विभिन्न राज्यों से आने वाले ट्रक चालकों द्वारा सड़क किनारे रोक दिए जाने वाले वाहन भी दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रहे हैं।

प्रदेश में करीब डेढ़ हजार प्वाइंट्स ऐसे हैं, जिन्हें खतरे वाला माना जाता है। गांव देहात में जगह जगह बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। इन स्पीड ब्रेकर को हटाने व डेंजर प्वाइंट्स खत्म करने के दावे पिछले कई सालों से किए जा रहे हैं, मगर न तो अधिकारी इस दिशा में गंभीर हैं और न ही सरकार मजबूती से कार्रवाई करती दिखाई दे रही है।

इस लापरवाही का असर यह हो रहा कि हर साल करीब पांच हजार लोग अपनी जान से हाथ धो रहे हैं