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खामियां दूर करने के लिए कौंसिल की मीटिंग 30 को

जीएसटीप्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए आढ़तियान एसोसिएशन ने मेडिकल एसोसिएशन की ओर से कार्यशाला हुई। कार्यशाला में डीईटीसी रविंद्र सिंह और ईटीओ सुरेंद्र गोदारा प्रताप सिंह के अलावा कर निरीक्षक धर्मपाल संत स्वरूप भी थे। डीईटीसी रविंद्र सिंह ने कहा कि जीएसटी को लेकर शुरुआती दौर में कुछ दिक्कत सकती है। भविष्य में भी व्यापारियों की इच्छानुसार इस तरह की कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला के मुख्य वक्ता सीए मनीष बांसल ने जीएसटी नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि जीएसटी सिस्टम यानि वस्तु एवं सेवा कर अागामी 1 जुलाई से लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया में जो खामियां रह गई हैं उन्हें दूर करने के लिए 30 जून को जीएसटी कौंसिल की मीटिंग होगी। 20 लाख रुपये से अधिक का कारोबार करने वालों या संस्थाओं को जीएसटी पंजीकरण कराना अनिवार्य सीए बांसल ने बताया कि जीएसटी सिस्टम के तहत 20 लाख रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले व्यापारियों या संस्थाओं को जीएसटी पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। जबकि 75 लाख तक का कारोबार करने वाले व्यक्ति और संस्थाएं कंपोजिट स्कीम में रजिस्टर्ड रह सकते हैं और उन्हें अपनी सेल का एक प्रतिशत बतौर टैक्स चुकाना होगा। इसके अलावा उन्हें पांच रिटर्न ही भरनी होगी। जीएसटी में टैक्स की पांच श्रेणियां 0 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत रखी गई हैं। इन टैक्सों में सभी प्रकार के चुंगीकर, एक्साइज कर अन्य करों को समाहित किया गया है लेकिन इन्कम टैक्स से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है। दवा विक्रेता 0 से 28 प्रतिशत तक सभी कर श्रेणियों में आएंगे। इस कानून के तहत एक माह में की गई सभी प्रकार की बिक्री कारोबार रिटर्न अगले माह की 1 से 10 तारीख तक, खरीद 11 से 15 तारीख तक और टैक्स मिलान 16 से 20 तारीख तक अपलोड करना अनिवार्य होगा। जिन्होंने अभी तक जीएसटी पंजीकरण नहीं करवाया है उनका पंजीकरण 25 जून से आरंभ होगा। कर छूट वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए अलग से जो बिल बनेगा उसे सप्लाई बिल कहा जाएगा। आपूर्तिकर्ता ने जिस कीमत पर बिल बनाया है बाद में पता चलता है कि कीमत कम है तो उस स्थिति में वह क्रेडिट नोट जारी करेगा। इसी तरह बाद में पता चलता है कि कीमत ज्यादा है तो डेबिट नोट जारी करना होगा।