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विधायकों ने पढ़े हुड्डा के कसीदे तो खुद देनी पड़ी सफाई, बोले- ओहदे की लालसा में नहीं आया हूं

.किसानों के मुद्दों को लेकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की महापंचायत उनके खुद का शक्ति प्रदर्शन सरीखा रही। मंच पर कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों-पूर्व विधायकों ने यह जताने की कोशिश की कि हुड्डा से ही कांग्रेस है।

हाल ही में इनेलो छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व विधायक बीएल सैनी ने तो यहां तक कहा कि हुड्डा नहीं तो कांग्रेस भी नहीं। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना ने कहा- पार्टी नेतृत्व को भी सोचना होगा कि हुड्डा ही भला कर सकते हैं। मंच पर जब हुड्डा का गुणगान होता रहा तो पूर्व सीएम को सफाई देनी पड़ी। बोले- ‘मैं इस महापंचायत में सीएम बनने या किसी ओहदे की लालसा में नहीं आया। किसान का बेटा हूं, किसान की बदहाली देखी नहीं गई। इसलिए महाभारत की धरती से शंखनाद किया है। इस दौरान 14 प्रस्ताव रखे गए। अगली महापंचायत जींद में 5 जुलाई को होगी।
 
हुड्डा ने कहा- भाजपा ने बड़े वादे किए, किसान को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश देने की घोषणाएं की। जब भाजपा सरकार बनी थी, तब उन्होंने कहा था, एक साल तक सरकार का किसी तरह का विरोध नहीं करेंगे, लेकिन ढाई साल बीतने को हैं, भाजपा ने एक भी फैसला जनहित का नहीं लिया। जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा।
 
हुड्‌डा ने कहा था- इनका बस चले तो ताजमहल का नाम बदल दें, दहिया बोले- ये तो सिंगल हैं, कैसे बदल सकते हैं
 
राई से विधायक जयतीर्थ दहिया ने कहा कि गाड़ियों के पीछे लिखा होता है कि रोएंगी सानू याद करके, वही हालात प्रदेश की जनता के हैं। खट्टर का न तो करनाल से और न ही हरियाणा से कोई वास्ता है। ये तो बाहर के हैं। खट्टर हुड्डा द्वारा शुरू किए गए कामों के पत्थर बदलने में लगे हैं। हुड्डा से मेरी बात हो रही थी कि इनका बस चले तो ये ताजमहल का नाम बदल दें। मैंने कहा- ताजमहल तो बेगम की याद में शाहजहां ने बनवाया था, ये तो सिंगल हैं, ये कहां से बदल देंगे नाम। इसके बाद पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूल चंद मुलाना ने भी चाय बनाने वाले, खिचड़ी बनाने वाले को सत्ता सौंपने की बात कहते हुए चुटकी ली।
 
कुर्ता उतारकर प्रदर्शन करने वाले खा रहे न्यूजीलैंड की ठंडी हवा: पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा ने कहा कि किसानों के मुद्दों को लेकर कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने वाले ओपी धनखड़ व सुभाष बराला वादे भूलकर ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में ठंडी हवा खा रहे हैं। किसान गोलियां खा रहे हैं। आने दो दोनों को इनके कपड़े फिर से उतरवाएंगे।