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टीबी की एफडीसी फार्मूले से निर्मित दवा की शुरूआत

नारनौल, 31 अक्टूबर: वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को पाने के लिए टीबी के मरीजों के लिए हरियाणा सरकार ने वर्तमान में चार प्रकार की दवाइयों के समायोजित मिश्रण से एफडीसी फार्मूले से निर्मित दवा शुरू की है। इसे मरीज को वजन के अनुसार रोजाना लेनी होगी।  
सिविल सर्जन डा. डीएन बागड़ी ने आज से संशोधित राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सिविल सर्जन कार्यालय में दैनिक उपचार की दवाइयों की शुरूआत की। उन्होंने बताया की इससे पूर्व मरीज को चार प्रकार की सात गोलियां साथ लेने में परेशानी होती थी। इससे मरीज बीच में इलाज छोड़ देता था, लेकिन अब एक गोली में ही चारों दवाइयों के मिश्रण उपलब्ध हैं। इसे मरीज को अपने वजन अनुसार दो से पांच गोलिया प्रतिदिन लेनी होगी।
 डा. अशोक कुमार ने बताया कि टीबी एक नोटिफाईबल बीमारी हैं। इसलिए जो भी सरकारी या प्राईवेट डाक्टर टीबी के मरीज की दवा शुरू करता है उसे अब मरीज की सुचना जिला क्षयरोग केंद्र नारनौल मे देना आवश्यक है। जिला क्षयरोग अधिकारी इसके नोडल अधिकारी हैं। 
उन्होंने बताया कि प्राइवेट अस्पताल के मरीज के इलाज की प्राप्त सुचना को निक्षय नाम आनलाइन पोर्टल पर चढ़ाया जाता है व प्रत्येक मरीज के इलाज से संबंधित मानिटरिंग की जाती है। सरकार द्वारा टीबी रोग को खत्म करने के लिए बेहतरीन जांच व इलाज की सुविधा मुफ्त दी जा रही है।